भूल गया था अपना असली किरदार मोहब्बत में,
आज परछाईं में खुद को मुस्कुराते हुए देखा है..!!
विरक्ति
जब सोच में मोच आती है
तब हर रिश्ते में खरोंच आती है. !!
संवेदनाएं कहां शेष हैं अब इन मुर्दों के शहर में,
तेरहवीं के भोजन में भी नमक के लिए लड़ पड़ते हैं..!!
विरक्ति
यू ही सा था कोई जिसने मेरी जिंदगी मिटाई
ना कोई खुदा ना कोई खुदाई
बड़ा एहसान हम फ़रमा रहे हैं
कि उन के ख़त उन्हें लौटा रहे हैं
किसी सूरत उन्हें नफ़रत हो हम से
हम अपने ऐब ख़ुद गिनवा रहे हैं
वो पागल मस्त है अपनी वफ़ा में
मिरी आँखों में आँसू आ रहे हैं
अजब कुछ रब्त है...