लौट आता है मन,अकेलेपन के घोंसले में चिड़िया की तरह...
युद्ध का ज्वालामुखी है फूटताराजनैतिक उलझनों के ब्याज सेया कि देशप्रेम का अवलम्ब ले !किन्तु, सबके मूल में रहता हलाहल है वहीफैलता है जो घृणा से, स्वर्थमय विद्वेष से !युद्ध को पहचानते सब लोग हैंजानते हैं, युद्ध का परिणाम अन्तिम...