मछलियों को लगता था
के जैसे वे तड़पती हैं पानी के लिए
पानी भी उनके लिए
वैसा ही तड़पता होगा।
लेकिन जब खींचा जाता है जाल
तो पानी मछलियों को छोड़कर
जाल के छेदों से निकल भागता है।
पानी मछलियों का देश है
लेकिन मछलियां अपने...
हम जिस दुनियां में रहते हैं,
उसका नकलीपन बिल्कुल असली है...
सांप से ये सुनकर शर्मिंदा हुए
जब से इंसान को काटा है फन दुखता है
खुश रहने का बस एक ही मंत्र है
उम्मीद बस खुद से रखो किसी और इंसान से नहीं।
अब्दुल कलाम
पीड़ा कितनी भी हो अब हालातों से समझौता कर लेता हूं,
सुन ना सके कोई चीखें मेरी इसलिए होंठ सिल लेता हूं..!!
विरक्ति