आप वो नहीं होते जो आप बतातें हैं आप वो होते हैं जो आप छुपाते हैं

गांव बदलकर शहर हो रहा हैं, और इंसान बदलकर जहर हो रहा हैं...

अरे नासमझ है, नादान है, वो मन कि कच्ची हैं अभी, पढ़ ना सकी कसीदे मेरे इश़्क़ के, शायद वो बच्ची हैं अभी..!! विरक्ति

मेरे दिल मे मत झांकना धुंआ बहुत है , बची कुची ख्वाइशें जला रही हूँ मैं ।।

मुकद्दर कि चोट ऐसी खाई थी मैंने,आज हर कदम पर फिसल रहा हूं,कभी झूठे सुख, तो कभी झूठी हंसी लिये,मैं किरदारों पर किरदार बदल रहा हूं..!!

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