स्त्री तुम्हारी ब्याहता जरूर है , पर तुम उसके विधाता नहीं हो

आहिस्ता बोलने का उनका वो अंदाज भी गजब था, कानों तक को खबर न हुई, और दिल ने सब समझ लिया।

सिर्फ छू कर बहक जाने को नही... उतर कर रूह में, महक जाने को प्यार कहते है...

धीरे धीरे सब छोड़ जाते है,, ये तो बस गुजरता एक साल है।।

दो ही लोग तो जिंदगी में याद रहते है एक हाथ मिलने वाला दुसरा साथ छोड़ने वाला..

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