यह लड़ाई साझी थी...मुल्क से मुहब्बत साझी थीनफ़रत से लड़ाई साझी थी कभी-कभी जो होती थीवो हताशा साझी थी झीख...खीज...अनबनहंसी-बैठकीसब साझी थी और साझी रहेगी तुम्हारा हिस्साअब तुम्हारी यादें देंगी तुम्हारी यादेंसब में साझी रहेंगी
अपने फैसलों पर कभी पछतावा ना करें,हर गलती आपको मजबूत बनाती है..!!
फर्क बहुत है तेरी मेरी समझ में,..तूने जज़्बातों से सीखा है और मैने हालातों से..!!
धूप तो यूँ ही बदनाम है ,जलन तो इंसानों को एक दुसरे से है ..!!
लक्ष्य सही होना चाहिए ,क्योंकि काम तो दिमक भी दिन रात करती है , पर वो निर्माण नहीं विनाश करती है ...