यह लड़ाई साझी थी...
मुल्क से मुहब्बत साझी थी
नफ़रत से लड़ाई साझी थी
कभी-कभी जो होती थी
वो हताशा साझी थी
झीख...खीज...अनबन
हंसी-बैठकी
सब साझी थी
और साझी रहेगी
तुम्हारा हिस्सा
अब तुम्हारी यादें देंगी
तुम्हारी यादें
सब में साझी रहेंगी