वो हमारे परिवार का दुःख कैसे समझेगा जिसका अपना कोई परिवार ही नहीं है !
व्यक्ति में इतनी ताक़त हमेशा होनी चाहिएकी अपने दुःख अपने संघर्षो से अकेला जूझ सके
भला उनका भी बहुत कर रखा है,जिंनकी नजरों में आज हम गलत है।
घर के बड़े बेटे पर जिम्मेदारी डाली नही जाती है,वो जिम्मेदारी को महसूस करता हैं,क्योंकि वो बाप के समान होता है।
आज की सुबह खास है बादल का वो टुकड़ा बारिश के साथतेरी यादों की फुहार भी लाया है मैं खुद को आज सींचूँगीमन में बसी विरह की तपिशको इन गिली बूंदो सेकुछ नयी कलियाँ कुछ नये सपनेकुछ नये से तुम...