खतरा देखकर डसने वाले जीव जंगलों में रहते हैं, और मौका देखकर डसने वाले मकानों में...

सितमगर हो तुम खूब पहचानते है तुम्हारी अदाओ को हम जानते है दगा बाज़ हो तुम सितम ढाने वाले..

परत चढ़ी है लाचारी की, आंखों से बहती अश्कों कि धार है, सिकुड़ रही हैं आंतें भूख से, लेकिन मिलती सिर्फ दुत्कार है..!!

मन से उतर रहे हैं, दिल में रहने वाले...

हम ईश्वर से वो मांगते हैं जो हमें अच्छा लगता है, परन्तु ईश्वर हमें वो देते हैं जो हमारे अच्छे के लिए होता है!

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