"मेरे खेत की मिट्टी से पलता है तेरे शहर का पेट
मेरा नादान गांव अब भी उलझा है किश्तों में"
अगरबत्ती की तरह तुम्हें खुशबू ही देंगे,
तुम शौक से चाहे जितना भी जला लो हमे।
जय किसान - जय युवा !!
वादों की जरूरत नहीं होती उन रिश्तो में,,
जहां पर भरोसा अपने आप से ज्यादा होता है।।
यह कविता नहीं
जीवन का सार है
जिसने ख़ुद को ना चाहा
उसका जीना बेकार है
सौ सितारों के जहां भी
उसके लिए अंधकार है
जो ख़ुद को ना चाहे
खुद को
सजा दे
जो खुद को ना चाहे
किसी को क्या
ख़ुशी दे
जो खुद को खुशी दे
मोहब्बतें जगा दे
जो खुद...