मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला
घरों पे नाम थे नामों के साथ ओहदे थे
बहुत तलाश किया कोई आदमी न मिला
ख़ुदा की इतनी बड़ी काएनात में मैं ने
बस एक शख़्स को माँगा...
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
ये दुनिया कांटों जंगल है
नफ़रत की आग दिलों में दहकती है
एक तू ही मेरे इश्क किताब
जहां तूं बसंती फूलों सी महकती है
खुशियां खत्म हो चुकी मेरे जीवन से,
मैं अवसादों का रहगुजर हूं,
और जिसे कोई नहीं तराश सकता,
मैं वो मानव निर्मित पत्थर हूं..