न जी भर के देखा न कुछ बात की बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की

ये दुनिया कांटों जंगल है नफ़रत की आग दिलों में दहकती है एक तू ही मेरे इश्क किताब जहां तूं बसंती फूलों सी महकती है

खुशियां खत्म हो चुकी मेरे जीवन से, मैं अवसादों का रहगुजर हूं, और जिसे कोई नहीं तराश सकता, मैं वो मानव निर्मित पत्थर हूं..

मेरे जीवन से मिला एक तजुर्बा, आज भी बहुत अहम् था, प्यार, भरोसा, वफ़ा, ज़फा, इंसान के लिये सिर्फ वहम् था..!!

कुछ सामान हुआ इधर उधर फिर से सम्भाल कर रख दिया पर नुक़सान ना हुआ हालाँकि तूफ़ान तेज था और मैं जानती थी कि वो ज़िद्दी है ……

Translate »