हम खाली किताब थे... लोग आते गए सबक छपता गया..!!

तेरे वजूद से हैं मेरी मुक़म्मल कहानी, मैं खोखली सीप और तू मोती रूहानी...!!

कुछ दिली हसरतें कहें या ना कहें,या अनकहा सा कह दें, उनसे उन्हीं का जिक्र करें या फ़िर हवाओं से कह दें,

प्रेम और अटैचमेंट में फर्क होता है... प्रेम स्वतंत्र होता है..!!

तेरे इख़्तियार में क्या नहीं, मुझे इस तरह से नवाज़ दे यूँ दुआएँ मेरी क़ुबूल हों, मेरे दिल में कोई दुआ न हो

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