बेवफाओं से हार कर वफादारो से बदला लेते है लोग।

बेटियाँ जो सिर्फ़ बेटियाँ होती हैं माँ की अनुपस्थिति में माँ पिता की ग़ैरमौजूदगी में पिता।

माँ एक बोझा लकड़ी के लिए क्यों दिन भर जंगल छानती, पहाड़ लाँघती, देर शाम घर लौटती हो? माँ कहती है : जंगल छानती, पहाड़ लाँघती, दिन भर भटकती हूँ सिर्फ़ सूखी लकड़ियों के लिए। कहीं काट न दूँ कोई...

कुछ लोग ज़िंदगी में भी मुर्दा होते है और कुछ मरने के बाद भी जिंदा ...

मेरे दिल को चकनाचूर करके, उसने मेरे भरोसे को तोड़ा था, दुनिया समझ बैठा था जिसे अपनी, उसने ही अकेला छोड़ा था.

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