घर बटा बर्तन बटे सारी ज़मीनें बाँट लीं
बाप के मरते ही बच्चों ने पतंगें छाँट लीं
इक तरीक़ा ये भी था फल बाँटते वो उम्र-भर
भाइयों ने पेड़ काटा और लकड़ी बाँट लीं
शीशे, यादें, सपने, रिश्ते,
कब कहाँ टूट जाए कुछ नहीं पता।
तुम्हें छूकर मैंने जाना
किसी रेलगाड़ी के गुजरने पर
धरती कांपती क्यों है।
तुम्हें चूमकर मैंने जाना
छूइमूई के पौधे का रहस्य।
तुम्हारे आलिंगन से मैंने जाना
चन्द्रमा पर प्रथम मनुष्य होने का एहसास।
तुमसे प्रेम करके मैंने जाना
मछुआरे और मछली के बीच...
आज से लक्ष्य पर धयान दूंगा
दिशा खुद मिल जाएगी
दुआ के वक्त आंखों का भर आना,
कुबूलियत की सबसे बड़ी दलील है !!