बदलाव कभी दर्दनाक नहीं होता,
केवल बदलाव का विरोध दर्दनाक होता है।
बुद्ध
तुम अलविदा कहकर चले गएऔर ना जाने कितने ही मौसम बदल गएपर देखो ना…,मैं आज भी वहीं खड़ी हूंक्योंकि मैं तुम्हें अलविदा ना कह पाई!
जब मूड ख़राब हो तो
जिंदगी नहीं मौत प्यारी लगती है
अक्सर, पिताओं के गुज़र जाने के बाद ही
हम उनसे प्यार करना सुरु करते हैं.
हैरत इसपर नहीं कि धर्म का धंधा हो रहा है ,
हैरत इसपर है पढ़ा लिखा भी अंधा हो रहा है !
ये जो मेरे मुंह पर मेरे और तुम्हारे मुंह पर तुम्हारे हितैषी हैं,
स्वार्थी, चालबाज और गद्दार है वो जिनकी फितरत ऐसी है..!!
शाम ख़ामोश है पेड़ों पे उजाला कम है
लौट आए हैं सभी, एक परिंदा कम है
फ़हीम जोगापुरी
काश तेरी जुदाई की कोई सरहद होती,
पता तो रहता अभी कितना सफर और तय करना है
फलसफा जिंदगी का कौन समझ पाया है..
जिया तो वही है, जो मौत से टकराया है...!!
विज्ञान का विद्यार्थी रहा हूँ इसलिए बता रहा हूँकि भूत जैसी कोई चीज नहीं होती…पर चुड़ैलें सच में होती हैं भाई.!!
ज़रूरत के हिसाब से अल्फ़ाज़ तलाश लाते हैं,हम तो शायर हैं,सबके दिल की जान जाते हैं।
सकारात्मक कार्य करने के लिए हमें
एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए।
बुरा वक़्त भी गुज़र ही जाता हैबस रब को हमारा सबर आजमाना होता है!
धर्महित के कार्य में गिलहरी ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई थी,सराहना जब मिली श्रीराम से तब पीठ पर तीन धारियां पायी थी..!!
बेचैनियों के दौर में....सकूं की दवा हो तुम....!!
दिल में खंजर रखकर मुंह से शहद उगलने वालों से ग्रस्त हूं,
समझ चुका स्वार्थी किरदार सबके इसलिए अब उन्मुक्त हूं..!!
चाँदनी की रौशनी में खो जाएं,
ख्वाबों की दुनिया में खो जाएं।
दिल की धड़कनों को ताल में बदलें,
खुद को खो जाएं, खुद को खो जाएं।
प्यार की बारिश में भिगो जाएं,
खुशियों की लहरों में उड़ जाएं।
ख्वाबों की उड़ान में सवारे,
खुद को खो...
सफलता डिग्री नहीं....
हुनर मांगती है...!!
अगर तुम जान जाओ तकलीफ मेरी, तो तुम्हें मेरे मुस्कुराने पर भी तरस आयेगा…
बेड़ियां बंधी हैं जिस्म पर, परिंदें नोच खा रहे हैं,
देख तेरे विरह में ये कैसे कैसे ख्वाब आ रहे हैं..!!
विरक्ति