sj_coat_512x512_web

World's Best Cow Hospital

मुख़ातिब हूँ मैं ख़ुद से, मग़र बात तुम्हारी होगी..! मैं अपने ज़हन के उसूलों से तो नहीं फ़िरने वाला।।

नफ़रत के खेल में बस ख़ून है, मुहब्बत करो, इसमें सुकून है।

निगाहें आज भी उनकी याद में बेचैन रहती हैं, ये दिल उदास रहता है जुबां खामोश रहती हैं, जब मयस्सर दीदार उनका ख्वाब में होता है, तब नींदें हराम होती हैं आंखें रो पड़ती हैं..!! विरक्ति

थक गया हूं मेहमान की तरह घर जाते जाते, बेघर हो गए हम चंद रुपए कमाते कमाते..!

किरदार कितना भी साफ क्यों ना हो, लोग वही सोचेंगे जो उनके मन में होगा…

तू रहे मेरी हँसी में, मैं रहूँ तेरी ख़ुशी में.. ♥️♥️

माथे पर बिंदी.आंखों पर हया.हायक्या खूबसूरत बला है तेरी हर इक अदा…

अगर जो चाहा है वो नही मिला..तो एक बार जो मिला है उसे चाह कर देखो..!!

वास्ता पड़ता है तो नस्लो का पता चलता हैं, बातों से तो हर कोई खानदानी लगता हैं...

उस एक लम्हे को ढूंढो, जो तुमको ढूंढता है गुज़रते लम्हों से यूं बदगुमान क्या होना....!!!

कुछ नही थी ज़िन्दगी तुम्हारे बिना.. तुम मिले हो जब से मुझे जीना आ गया…!!

सारा झगड़ा ही खवाहिशो का है ,ना गम चाहिए ना कम चाहिए ।।

जो गलत है उसका विरोध खुलकर कीजिए,चाहे राजनीति हो या समाजइतिहास आवाज उठाने वालोंपर लिखा जाता है तलवे चाटने वालों पर नहीं।

कुछ ऐसे लोग भी मिलेंगे जिंदगी में , जो साथ बैठकर हंसेंगें और पीठ पीछे डसेंगे

वक्त भी कैसी पहेली दे गया उलझने सौ और जान अकेली दे गया

वो मंदिर भी जाती है ,वो मस्जिद भी जाती है बेटा बीमार हो तो मां मजहब भूल जाती है

तर्क किये बिना किसी भी बात को आँख मूंदकर मान लेना भी एक प्रकार की गुलामी है भगत सिंह

कुदरत ने हमें हीरा बनाया है, बशर्ते जो घिसेगा वही चमकेगा…!

धूप तो धूप है इसकी शिकायत कैसीअबकी बरसात में कुछ पेड़ लगाना साहब ~ निदा फ़ाज़ली

जिम्मेदारियों के मशवरे मुझे न दो मैंने भरी जवानी में ख्वाहिशें जला डाली हैं!


Concept, Created & Designed by sureshjain.com


© copyright 2025. sureshjain.com All Rights Reserved.

Translate »