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World's Best Cow Hospital

कभी गोधूलि बेला मेंघंटा ध्वनि से तुम आ जाओ….🌿

एक समंदर मेरे अंदर मस्त कलंदर... उछल रहा है उछल उछल कर निगल रहा है वक्त को वक्त की बेवजह पाबंदीओं को… अंदर के समंदर से कभी वक्त कहां बड़ा हो पाया ❓ मैंने मुझको हमेशा वक्त से बड़ा पाया इस लिए अंदर के समंदर में वक्त को डूबता पाया।।

किस तरह जमा कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के

नफ़रत तो इंसान का बनाया हुआ जाति मसला है...🖤🖤 वरना कुद़रत तो हमेशा मोहब्ब़त का दर्श़ देती है...❣️❣️

शक्ति चाहिए तो ज्ञान हासिल करो , और सम्मान चाहिए तो चरित्र अच्छा करो ..!!

अगर तुम किसी को शिद्दत से चाहोगे ना तो वो उतनी ही शिद्दत से तुम्हें जलील भी करेगा !!

हुस्न की क़ीमत कुछ खास नहीं होती बदन अक्सर ऊंचे दामों में बिकता है !

रिस्तो का आलम अब कुछ ऐसा है हाल भी पूछते है तो चाल लगता है

तुम किताबों के सामने झुक जाओ , ये तुम्हारे सामने दुनिया झुका देगी ..!! डॉ. भीमराव आंबेडकर

गांव की मिट्टी में पले बढ़े है,हमें अदाएं कम मर्यादाएं ज्यादा पसन्द हैं।

उसने हमें छोड़ा शायद कदर नहीं थी इश़्क़ की,हम अपनी वफाओं के बादशाह तो आज भी हैं..!!

रील बनाने से पहलेवोट देकर भविष्य बना लो

खामखां मैने गहराई पसंद कर ली, कोई उतरा ही नहीं मेरी सोच तक ।

सोच कैसी है ईमान कैसा है लफ्ज़ बता देते हैं इंसान कैसा है।।

भिड़ते,टकराते,छील के निकलते हैं रिश्ते, कितने चौराहों से गुजरते है रिश्ते, ज़ख्म जिस्मो पर नजर आते है सारे, कहने को रूह से उतरते है रिश्ते ..

वफा के रश्मों रिवाजों को बहुत देखा जमाने में निभाने का हुनर तो बस किताबों में होता है.. प्रज्ञा शुक्ला

जो खुद संभल कर चल नहीं सकते ठोकर लगते ही वो इल्जाम देते हैं पत्थर को

मिट्टी भी जमा की और खिलौने भी बना कर देखें , जिंदगी कभी ना मुस्कुराई फिर बचपन की तरह ।।

तेरे वास्ते फ़लक से मैं चाँद लाऊँगा, सोलह सत्रह सितारे संग बांध लाऊँगा"पर कच्छा खुद नही धोऊँगा.

इबादत में बैठे हुए लोगों को मारने पीटने का काम शैतानों का होता है इंसानों का नहीं...


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