कभी खामोश…कभी गमगीन,कभी सैलाबनजर आती है…ये जिंदगी भी कलाकार हैंशायद हर रोज नया किरदार निभाती है
जब एक बार जला ली हथेलियां अपनी
फिर खुदा ने भी उस हाथ में दिया ना दिया
कुछ होगाकुछ होगा अगर मैं बोलूँगान टूटे न टूटे तिलिस्म सत्ता कामेरे अंदर एक कायर टूटेगा -टूट मेरे मन टूटएक बार सही तरहअच्छी तरह टूटमत झूठमूठ - ऊब मत रूठमत डूब, सिर्फ टूट
~ रघुवीर सहाय
अंध कक्ष में बैठ रचोगे ऊँचे मीठे गान
या तलवार पकड़ जीतोगे बाहर का मैदान।
रामधारी सिंह दिनकर
इतरा रहे हो ज़िस्म पर नए हो इश्क़ में
रूह के तलबगार से पाला नहीं पड़ा
मेरी ज़िन्दगी में तेरा साथ कुछ इस तरह से हो,ताउम्र छेड़े तू अपनी अटखेलियों से और हया मेरे चेहरे पर हो..!!
बहुत कम लोग जानते हैं
कि वो बहुत कम जानते हैं
मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबू जी
अचेतन मन में कोई न कोई ऐसी ग्रन्थि होती है, जो चैन से कहीं भी बैठने नहीं देती...
दोस्ती करनी हो तो गणित के जीरो जैसी करो,जिसके साथ मिल जाओ उसकी कीमत बढ़ जाए…
एक एक कर के कितनों ने छोड़ा नहीं पताइक साथ याद आते हैं सारे कभी कभी
ख़ुद से बेहतर नहीं है कोई भी हमसफ़रअकेले रहना इस्तेमाल होने से बेहतर है !
मुझे मालूम था मेरी मंज़िल "मौत" है,
फिर भी चाह "जीने" की करता रहा,
मुझे नहीं थी परख सही या ग़लत की,
मैं गुस्ताखी पर गुस्ताखी करता रहा,
और जब "जुदा" हुआ उनसे तब मैंने जाना,
सफ़र में तो वो थे "ठोकरें" मैं खाता रहा..!!
कुछ लोग जिंदगी से ऐसे जाते हैं जैसे कभी जिंदगी का हिस्सा थे ही नही, दुख इस बात का है की अलविदा कहने तक की ज़रूरत नही समझते.
बेईमानी से कमाया हुआ पैसा ,
बीमारी में चला जाता है.....!!
महंगे तुझे क्यों लग रहे हैं ए ज़िंदगी,
खर्चा सिर्फ सासों का ही है हमारा....
हसीनों की गलियों से आँखें बंद कर गुज़रना लड़ गयीं जो उनसे आँखें, गड्ढे में जा गिरोगे।
मेरा मुझ में कुछ नहीं, जो कुछ है सो तेरा।
तेरा तुझकौं सौंपता, क्या लागै है मेरा॥
तुम्हारी नामर्दानगी बुजदिली,
एक दिन इस देश की तबाही का कारण बनेगी।
सदा दिवाली सन्त की ,बारह मास बसंत।
प्रेम रंग जिन पर चडे ,उनके रंग अनंत ।।