संघर्षो के दिनों में, तन्हा हर इंसान होता है।
साथ न कोई यार होता है, और न इतवार होता है।।
बहुत नज़दीक आती जा रही हो ,
बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या ..!!
जौन एलिया
चाय पर मै एक संविधान लिखूँगा
जो चाय नहीं पीते उन्हे खराब लिखूँगा...
न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है।
मैथिलीशरण गुप्त
उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो
न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
अच्छा इंसान तो अपने जुबान से ही जाना जाता है,वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती है..!!
महादेव के दरबार में सबकी समस्याओं का हल है,
कीमत केवल सच्ची आस्था और एक लोटा जल है..!!
तेरे अपने ना कर पायें तुझपर उपहास... तू कर कुछ ऐसा कि बन जायें इतिहास...!!
जैसे जल द्वारा अग्नि को शांत किया जाता है वैसे ही ज्ञान के द्वारा मन को शांत रखना चाहिए।
~ वेदव्यास
इतिहास गवाह हैं, जब भी फ़ोन पर कॉल आता हैं,पास बैठा व्यक्ति पूछ ही लेता हैं,किसका फोन था?
पैसा हैसियत बदल सकता है,
औकात नहीं....
अच्छे निर्णय लेना अनुभव से आता है,
और अनुभव बुरे निर्णय लेने से आता है।
वफा के रश्मों रिवाजों को बहुत देखा जमाने में
निभाने का हुनर तो बस किताबों में होता है..
प्रज्ञा शुक्ला
कायरता कि लेप चढ़ाकर,
अपनी मर्दानगी खत्म करते हैं,
औरत अगर उड़ने के ख्वाब देखे,
तो उसपर ज़ुल्म करते हैं..!!
माँ
एक बोझा लकड़ी के लिए
क्यों दिन भर जंगल छानती,
पहाड़ लाँघती,
देर शाम घर लौटती हो?
माँ कहती है :
जंगल छानती,
पहाड़ लाँघती,
दिन भर भटकती हूँ
सिर्फ़ सूखी लकड़ियों के लिए।
कहीं काट न दूँ कोई...
आज फिर नहीं आई नींद रात भर
क्योंकि कल पूरा दिन में सो रही थी !!
कभी बच्चों सी झलकती हैं नादानियां मुझमें,
कभी इतना संभालता हूं की उम्र कांप जाती है..
आप ऐश कीजिए जेब में रखीं दौलत से ,
मैं तो झोले में इंसानियत रखकर खुश हूं ।।
खुद को अच्छा बना लीजिए,
दुनियां से एक बुरा इंसान कम हो जायेगा....
गाँव को छोड़ के हम शहर कमाने आए
अब ये एहसास हुआ जान गँवाने आए!