खलल पड़ता है मेरी नींद में मुर्शदजब कोई ख्याल मेरे ज़हन पर हावी होता है
रास्ते कभी बंद नहीं होते,
अक्सर लोग हिम्मत हार जाते हैं..!!
प्रेम चतुर्वेदी
मुस्कान को तमीज चाहिएआंसुओ को तन्हाई
अकेला पन जब काटने लगा
तो बचपन की याद आई
भीड़ बहुत है आसपास सबके
पकड़े है कोई न कोई हाथ भी
दिल ने जब सुकून चाहा
याद मां की गोद ही आई
हां खुश हूं में कहता है हर कोई
हंसी...
मेरी दोस्त ने अभी कहा - ये जो लड़कियां होती है ना, इनसे आप थोड़ा दूर रहा करिए!….इनके पास रोने के सिवा कुछ नहीं होता.
खामोशी से खत्म हुए रिश्ते,
मन में गहरा शोर छोड़ जाते हैं।
मिट्टी के मटके और परिवार का मूल्य,
केवल बनाने वाले को ही ज्ञात होता है,
तोड़ने वाले को नहीं..!!
ख़्वाहिश ये नहीं कि वो लौट आए मेरे पास,
तमन्ना ये है कि उसे जाने का मलाल हो...
हजारों कमियां होगीं मुझे में पर
औरों सा डबल रोल में तो नहीं हूं ना...!!
अब किसी की तलब नही हमे...
अब हम अपनी ही तलाश में है....!!
जब क्रूर समाज ममता को नारी की कमजोरी समझ बैठे,
तब उस ममता को शक्ति का नव रूप बनाना जरूरी है।
ब्रह्मा से कुछ लिखा भाग्य में मनुज नहीं लाया है,
अपना सुख उसने अपने भुजबल से ही पाया है।"
रामधारी सिंह 'दिनकर'
नाराज़गी कभी वहाँ मत रखिये !जहाँ आपको बताना पड़े कि आप नाराज़ हो !!
कविता गाकर रिझाने के लिए नहीं समझ कर खो जाने के लिए है।
रामधारी सिंह दिनकर
जब तक मन में खोट और दिल में पाप है !
तब तक बेकार सारे मंत्र और जाप है !
फिल्टर सिर्फ चित्र का होता है,चरित्र का नहीं….
जहाँ कर्म से भाग्य बदलते,
श्रम निष्ठा कल्याणी है।
त्याग और तप की गाथाएँ,
गाती कवि की वाणी है॥
ज्ञान जहाँ का गंगा जल सा,
निर्मल है अविराम है।
हर बाला देवी की प्रतिमा,
बच्चा-बच्चा राम है॥
सिर्फ सपनों का पीछा करने से नहीं मिलती मंजिलें, रफ्तार समय से मेल भी खानी चाहिए !
तुम्हारा एकांत ही तुम्हें मनुष्य बना सकता है,
भीड़ तुम्हें भेड़ बना देगी।
जया मिश्रा
थक गई हूँ जिम्मेदारियों से,,ज़िंदगी मुझे चंद पल तू सुक़ून के उधार दे..!!