तन्हाई में बस ये एहसास होता है, दूसरा कोई नहीं हमारे पास होता है।
तूने जो ना कहा मैं वो सुनती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही जाने किसकी हमें लग गई है नज़र इस शहर में ना अपना ठिकाना रहा दूर चाहत से मैं अपनी चलती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही ....
शादी उसकी भी होगी, और मेरी भी होगी,लेकिन "हमारी" होती तो क्या बात थी.
हम खाली किताब थे...
लोग आते गए सबक छपता गया..!!
पुस्तकालय एक ऐसा वृक्ष है, जहाँ विचारों के फल हर मौसम में लगते हैं ।
जिस दौर से हम गुजरे हैं ,
तुम गुजरते तो गुजर जाते...
जहाँ पहुँच के क़दम डगमगाए हैं सब केउसी मक़ाम से अब अपना रास्ता होगा
सारा ज़माना जब खिलाफ था भूलो नहीमें आपके बाप के कंधे से कन्धा मिलाए खड़ा था
उम्र कुछ नही कहती..
कारनामे हैसियत बता देते है..!!
जहां साधारण लोगों की हिम्मत टूट जाती है,
वहीं से इतिहास रचने वाले शुरुआत करते हैं
इस दुनिया में ऐसे भी शैतान है,
जो धर्म के नाम से सरकार बनाते है. !!
सोचती हूं, खुद से इश्क करूं मैं अबऔर खुद में ही मुकम्मल हो जाऊं
इधर- उधर झांकने के बजाय,खुद के मायने समझ जाऊं मैं अब
दूसरों की आंखों में आंसू लाने वाले ये क्यों भूल जाते हैंकि भगवान ने दो आंखें उन्हें भी दी हैं और कर्म समय चक्र के साथ घूमकर एक दिन हमारे समक्ष अवश्य आते हैं।
आप की सब से बड़ी दौलत आप का वक़्त है
जिसे भी दे रहे हो बहुत सोच समझ कर देना !!
अच्छा इंसान तो अपने जुबान से ही जाना जाता है,वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती है..!!
मोहब्बत की उम्र में जिंदगी, संघर्षो मे उलझी है।
किताबों के बीच गुलाब नही, आज भी 'कलम' रखी है।।
बिखरा वजूद…टूटे ख़्वाब…सुलगती तन्हाइयाँ….उफ़्फ़कितने हसीन…तोहफ़े दे जाती है,ये अधूरी मोहब्बत….
गिरगिट तो बेवजह बदनाम है,
असली रंग तो अपने बदलते हैं...
प्रेमिका को बाइक पर पीछे बिठा करब्रेक मारने का सपना, सपना ही रह जाएगा लगता है !