लड़कियाँ खिलौना नहीं होती जनाब,पिता तो यूँ ही प्यार से गुड़िया कहते है..
इश्क़ की इंतिहा ने क़ैस को मजनू बना दियाअपनी जां से गया लेकिन तारीख़ बना गया~आरिफ़
न चन्द्रमुखी न पारो२ पेग मारो और जिन्दगि आराम से गुजारो !!
कितना तकलीफ उठाकर कमाते है,,,
जब गाँव से कम उम्र के बच्चे शहर जाते है….
चरित्र कि कसौटी पर स्त्री के जज़्बात निचोड़े जाते हैं,पवित्रता कि परीक्षा में हर बार उसके कपड़े उतारे जाते हैं,हर पीड़ा सहकर भी खामोश रहती है वो,उसके ज़ख़्म तो भर जाते हैं मगर निशां छोड़े जाते हैं..!!
इंसान तो हर घर में जन्म लेता है मगर,इंसानियत कहीं कहीं ही जन्म लेती है…!!
यही जगत की रीत है, यही जगत की नीत
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत
"अगर सीखना है तो समंदर से सीखो...
वो बड़ा हो के भी अपने दायरे में रहता है"...!!
आज मैं उधर से निकला था जहाँ हम मिलते थे,
किसी ने वहाँ दीवार खड़ी कर दी.
समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये,
किसी व्यक्ति विशेष का नहीं….!!
स्वार्थ की बदबू मारने वाले मतलबी लोग…..
मतलब होने पर चंदन सी सुग़न्धित बातें करते है !!!
मैं और मेरा रेड कार्पेट
अक्सर ये बातें करते हैं
तू होता तो ऐसा होता
तू होता तो वैसा होता
तू बीच की रेत पे बिछता, तू गार्डन में फैला होता
तू समंदर के तल पे लेटकर मेरी ईगो सहला...
जबरदस्ती की नजदीकी से,
सुकून की दूरियां अच्छी हैं....
इरादा है बदलने का तो कोशिश कर बदलने की
अगर सूरज नहीं है तो चराग़ों से उजाला कर
मिलेगी हार या फिर जीत का परचम उठाएगा
नतीजा जो रहे लेकिन नया सिक्का उछाला कर
राघवेंद्र द्विवेदी
पैसों से सिर्फ पेट भरता है ,
दिल आज भी भावनाओं का ही मोहताज है
पुरुष को एक मात्र केवल ,
प्रेम से छला जा सकता हैं।
आँखों से निकले हर आँसू कोतलाश होती है अपनी एक मुस्कान की …
-मधुलिका
सदा जो दिल से निकल रही हैवो शेर और नगमों में ढल रही हैकी दिल के आंगन में जैसे कोईग़ज़ल की झांझर छनक रही है
कौन सीखा है सिर्फ बातों से ,
सबको एक हादसा जरूरी है।
जॉन एलिया
हम खुद को बेच भी देते तो कम पड़ता, उसके खुशियों की कीमत इतनी ज्यादा थी