जिंदगी ने यूँ उधेड़ा बुन न पाये,चाह थी क्या, क्या मिला हम चुन न पाये.
गिले शिकवे तमन्ना आरज़ू इज़हार क्या करते ,अटल थे फ़ैसले उसके तो फिर तकरार क्या करते
सफलता यूँ ही क़दम नहीं चूमतीथके हों पाँव फिर भी चलना पड़ता है
चालाकी,
चतुराई
और
बेशर्मी
के मिश्रण को
आजकल होशियारी कहते हैं!!!
जिस्मो की चाहत नेमोहब्बत के भाव गिरा दिए..!!
सबका दिल जितने में क्या फ़ायदा, मजा तो बस एक के दिल पर कब्जा करने में है..
इंसान की अक्ल बस इतनी सी है
उसे जानवर कहो तो गुस्सा आता है
शेर कहो तो खुश हो जाता है
फर्क करना ज़रा मुश्किल लगा था,जब चेहरे अपनों के गैरों से ही मिलने लगे थे…!
क्यों है
तेरा इन्तेजार ?
किस बात कि
है दरकरार ,, ?
जानता हूँ
कितनी ही सदायें दूँ
तू ना आएगा पलटकर
फिर भी क्यों है
जिया बेकरार
व्यर्थ है आशु
अब पिया मिलन
की आस,,,,,
आशु