जीवन जीते जी एक संग्राम है,
पहले कुछ करके दिखाना,
फिर अहंकार की मिट्टी में उसे दबने से बचाना…
उम्र बढ़ती, प्यार बढ़ता, अरमां जवां और दुनिया हसीन हो जाती,
तुम झरोखे से कुबूल कर लेती मुझको, तो जन्नत अधीन हो जाती !
अपने संघर्ष को अपना जुनून बना लो,जब तक वो तुम्हारी कहानी ना लिख दे…
औसतन…..आदमी अपनी जिंदगी का एक वर्ष औरतों को घूरने में ही बिता देता है.
कबीरा ते नर अँध है, गुरु को कहते और
हरि रूठे गुरु ठौर है, गुरु रूठे नहीं ठौर
कबीरदास
थोड़ी सी आवारगी भी जरूरी है जिंदगी में ,
कैद में रह कर परिंदे अक्सर उड़ना भूल जाते है ..!!
छत पर वॉक करने वाला मौसम है,
और छत से छलांग लगाने वाले हालात.
जिद और जूनून चाहिये जीतने के लिये..
हारने के लिये तो आपका डर ही काफी है..!!
ख़्वाब ख़्वाहिश ख़ैरियत है ज़िंदगीहक़ीक़त उल्फ़त कैफ़ियत है ज़िंदगी
एक उम्र के सौदे में बंधी हुईइनायत इबादत तबियत है ज़िंदगी..!
लाचार है बीमार है सही से चल नहीं सकता,एक गरीब बिना मेहनत किये पल नहीं सकता,और जो खुद कांटे हैं उन्हें तक़दीर सुख भेजती है,वहीं मुफलिसी उम्मीद लिए सड़कों पर फूल बेचती है..!!
जीभ कभी फिसलती नहीं है,
जो दिमाग़ में चल रहा है,
वो जीभ पर आ जाता है !!!