बहुत कम लोग है जो मेरे दिल को भाते है,और उससे भी कम लोग मुझे समझ पाते है।
बदलते लोगों की बात हमसे मत कीजिए ,
मैंने हमदर्द को भी सर दर्द होते देखा है ! !
मोह माया सब मृगतृष्णा है ...
यकीनन जीत जाते तुमसे वफाओं की बात में, हम तो बस तुम्हारी रंजिशों से हारे थे... बेवजह ही तुमपर ऐतबार किया था ख़ता थी हमारी , के हम तेरे सहारे थे...!!
किसी और से प्यार करना,जरूरत बन गई है उनकी,मेरे दिल को रुला देना ही,फितरत बन गई है उनकी !
और तो कौन है जो मुझको तसल्ली देताहाथ रख देती हैं दिल पर तेरी बातें अक्सर..!!
सुलझा हुआ मनुष्य वह है जो अपने निर्णय स्वयं करता है,
और उन निर्णयो के परिणाम के लिए किसी दूसरे को दोष नही देता !!!
न्यायार्थ अपने बन्धु को भी दण्ड देना धर्म है।
मैथिलीशरण गुप्त
घर के बाहर ढूँढता रहता हूँ दुनिया
घर के अंदर दुनिया-दारी रहती है
मित्रता बड़ा अनमोल रतन
कब उसे तोल सकता है धन?
धरती की तो है क्या बिसात?
आ जाय अगर बैकुंठ हाथ
उसको भी न्योछावर कर दूँ,
कुरूपति के चरणों में धर दूँ।
सिर लिए स्कंध पर चलता हूँ,
उस दिन के लिए मचलता हूँ,
यदि चले वज्र दुर्योधन...
मैं उठता हूं कभी कलम रखता हूंइस तरह इश्क के जज्बातों पर सर रखता होगा खेल कोई इश्क तुम्हारे लिए यारोंमैं तो मरे जिस्मों में मोहब्बत की रूह रखता हूं
हर बात पर शुक्र करना ये भी अल्लाह पाक की
नेमत है, कयोंकि अल्लाह पाक शुक्र करने की
तौफीक उन्हीं को देता है, जिससे वो राजी होता है
इस भरी गर्मी में कुछ तो सुकून आ जाये..!या तो तू आ जाये या मानसून आ जाये..!!
हमारा वर्चस्व पहले से ही मजबूत है,
आप उसकी नींव गिराने की कोशिश ना करें..!!
मेरा रूठना
तेरा मनाना मुझे
मेरा कहना
तेरा सुनना मुझे
मेरा समझाना
तेरा समझना मुझे
मेरा बेपरवाह होना
और तेरा जिम्मेदार
कहना मुझे
हाए...वो भी क्या
खुश़-फैमियां थी मेरी ।।
जलने वाले जलते रहो जलना तुम्हारा काम है,हम भी तुम्हे बुझने नहीं देंगे,क्योंकि यह हमारा काम है !
"अपनों" में रहें...
"अपने" में नहीं....!!🕊️
रात इकाई नींद दहाई
ख़्वाब सैकड़ा दर्द हज़ार!
दरिया हो या पहाड़ हो टकराना चाहिए जब तक न साँस टूटे जिए जाना चाहिए
शादी विवाह में जिनको ग़रीब समझकर बुलाया नहीं जाता है,
वही लोग अक़्सर अंतिम यात्रा में सबसे पहले पहुंचते हैं।