मेहनत एक ऐसी " मधुमक्खी" है,
जो बिना फूलों के कामयाबी का शहद चखा देती है।
क्यों अपना दर्द महफ़िल में सुनाया जाए
चलो मुस्कुरा कर सबका दिन बनाया जाए
आभा
वह जवाब मायने खो देते हैं, जो वक्त पर नही मिलते ...
वो मिली मुझे
लेकिन छोड़ने के लिए!
सफलता सार्वजनिक उत्सव है
जबकि असफलता व्यक्तिगत शोक ….. !!!
शीत लहर के स्पर्श से
जब मन झंकार उठा
मधु कूक कोयल से
जब हृदय में ज्वार उठा
तब शब्द हार पहन
विरही मन मुख से कविता गान उठा
इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ
क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ
अहमद फ़राज़
ख़ुद से बेहतर नहीं है कोई भी हमसफ़रअकेले रहना इस्तेमाल होने से बेहतर है !
कपड़े और चेहरे अक्सर झूठ बोलते हैं,
इंसान की असलियत वक्त बताता है..
आंधी ने तोड़ दी है दरख्तों की टहनियां
कैसे कटेगी रात परिंदे उदास हैं!
हम भी दरिया हैं,हमें अपना हुनर मालूम है
जिस तरफ भी चल पड़ेंगे,रास्ता हो जाएगा.
बशीर बद्र
और फिर छोड़ गया वो जो कहा करता था ,
कौन बदबख्त तुम्हें छोड़ के जा सकता है ।।
जो कल थे,वे आज नहीं हैं।
जो आज हैं,वे कल नहीं होंगे।
होने न होने का क्रम,
इसी तरह चलता रहेगा,
हम हैं,हम रहेंगे, ये भ्रम भी,
सदा पलता रहेगा।।
अटल बिहारी वाजपेई
वक्त के साथ चलिए ,
हर कोई आपके साथ चलेगा..!!
दर्द छुपाते छुपाते,दर्द में जीने की आदत हो गई।
भाई को डांटती हुई बहन से खूबसूरत दृश्य भला और क्या हो सकता है
एक तेरा कदम एक मेरा कदम,
मिल जाए तो जुड़ जायें अपना यह वतन…
मोमबत्ती को आखिर में ही पता चलता है कि
उसे उस धागे ने ही खत्म किया,
जिसको वो सीने में छुपाए रखती थी...
नहीं करते शरीक तेरे ख्याल में किसी और को,
हम तेरे ख्याल का भी बहुत ख्याल रखते हैं !!!
जो होने वाला है अब उस की फ़िक्र क्या कीजे
जो हो चुका है उसी पर यक़ीं नहीं आता!