जिम्मेदारियाँ जब सर पर हों,
तो जिन्दगी के दलदल भी कदमो को बढ़ने से रोक नहीं पाते ।
~ प्रह्लाद पाठक
रात तो सब की एक ही है ,
बस अंधेरा हर किसी का अपना अपना है ..!!
आज फिर से ओढ़ ली उसनेख़ामोशी की चादरज़बान उसकी मगर चीखना चाहती थी
पेशे के जुनून भुला देता है तपिश गर्मी की, वक़ील गर्मियों में भी कोट पहन के मुस्कुराता है
सोच रहा हूं कुछ दिनों के लिए गाजा पट्टी चला जाऊं
उधर माहौल अच्छा है ...।
यहां तो डर का माहौल है।
हमारी सादगी ही गुमनाम रखती है हमें,जरा सा बिगड़ जाएं तो मशहूर हो जाएं।
किसी का माथा चूमना ही तो प्रेम है
होंठ चुमना तो शारीरिक संबंध हो जाता है
चढ़ते सूरज के पुजारी तो लाखों हैं 'फ़राज़'डूबते वक्त हमने सूरज को भी तन्हा देखा
~ अहमद फ़राज़
अगर तुम किसी को शिद्दत से चाहोगे ना
तो वो उतनी ही शिद्दत से तुम्हें जलील भी करेगा !!
न चन्द्रमुखी न पारो२ पेग मारो और जिन्दगि आराम से गुजारो !!
बड़े खुबसूरत दिखते हैं वो,जिनके अंदर ज़हर भरा होता है…
समय सब कुछ बदल देता है..
जरूरत सिर्फ़ सब्र की है..!!
घर बटा बर्तन बटे सारी ज़मीनें बाँट लीं
बाप के मरते ही बच्चों ने पतंगें छाँट लीं
इक तरीक़ा ये भी था फल बाँटते वो उम्र-भर
भाइयों ने पेड़ काटा और लकड़ी बाँट लीं
आदत रही है हमारी दिल पर अकेले राज करने की, हम उनके नहीं होते जिनके दिल में हजारों कि भीड़ हो..!!
सुनो कृष्ण!!मौसम हरे रखनाऔर मन गीला
जो काम नही होता है शांति से,
फिर वह काम होता है क्रांति से ।
किनारा न मिले तो कोई बात नहीं,
दूसरों को डुबाके मुझे तैरना नहीं है।
घर के मुखिया को सच्चा और ईमानदार होना चाहिये।
झूठा फ़रेबी और जुमलेबाज नहीं !
तुम लोगो की बुराई छुपाओकल क़यामत के दिन अल्लाह तुम्हारे गुनाह छुपाएगा,,,
जिस दिन धरती से छिपकली, कॉकरोच और चूहे खत्म हो जाएंगे,उस दिन धरती पर स्त्रियों का पूर्ण शासन होगा.