मेरी तक़दीर में कभी कोईगम नही होता.. अगर तक़दीर लिखने का हक़मेरी माँ को होता…
काश हमारे प्यार की नैया भी कबूतर पार लगाता,
तुम्हारा पैगाम अपने पैरो से मुझ तक पहुंचाता,
ख्वाब सात जन्मो के हम भी देख लेते तुम्हारे साथ,
अगर मुकद्दर को होता मंजूर तो तुमसे मिलवाता,
और हम भी महका देते कमरे को गुलाब के...
बेटे खुश ना भी हों तो कौनसा, घर वालों को पता चलने देते हैं....
चिंतन से ही परिणाम को बदल सकते हैं…
चिंता से नहीं !!!
मरहम लगता है उसके ज़ख्मों पर,
वो हर भवसागर से तर जाती है,
जब बेटे कि पहली तनख्वाह से,
मां के सपनों कि साड़ी आती है..!!
जन्म लेना भाग्य की बात है
मृत्यु आना समय की बात है
मृत्यु के बाद लोगो के दिलों में
रहना ये कर्मों की बात है।
जीभ कभी फिसलती नहीं है,
जो दिमाग़ में चल रहा है,
वो जीभ पर आ जाता है !!!
मेरी ज़िन्दगी में तेरा साथ कुछ इस तरह से हो,ताउम्र छेड़े तू अपनी अटखेलियों से और हया मेरे चेहरे पर हो..!!
गम से खाली नहीं जिस्म का कोना कोई हम रहे न रहे हम पे मत रोना कोई..!!
मन ऊदास है
ना जाने कैसी
ये प्यास है,,,,
निगाहे ढूंढती है जिनको
ना जाने वो
किसके पास है,,,,
भरोसा टूटा हैं वहम की दवाई मत दो,
कहीं और जाकर शरीफ़ बनो मुझे सफ़ाई मत दो ..!!
तुम मेरी वो कमी हो,
जो कोई भी शख्स कभी पूरा नही कर सकता….!!
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सफ़र में होती है पहचान कौन कैसा है
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ये आरज़ू थी मेरे साथ तू सफ़र करता!
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मुझसे जो तुम मेरा हाल पूछते हो,
बहुत मुश्किल सवाल पूछते हो....
मजाक का सहारा लेकर लोग
दिल की बातें बोल जाते हैं...!!
माना कि दौर नहीं है सादगी का पर क्या करूँ नहीं आता दिखावा करना
लहज़े में उद्दंडता, खून में उबाल,जुबां पर ज़हर, अक्ल कम थी,आयी जब ज़िम्मेदारी तोमुंहपर झूठी मुस्कान और आंखे नम थी
तबियत की बात है जनाब , वर्ना जबाब ऐसे दूं कि सवाल ही पैदा ना हो ।।
बिछी थीं हर तरफ़ आँखें ही आँखें
कोई आँसू गिरा था याद होगा
रोटी कमाना बड़ी बात नहीं,
परिवार के साथ रोटी खाना बड़ी बात है...