मिट्टी के हम चराग़ हैं यूं मत बुझा हमें ,
नादान -- तेरे ताक की रौनक हमीं से है
इंसान अंदर से मर जाता है.
जब उसका सबसे मनपसंद शख्स बदल जाता है...
हो लेने दो बारिश हम भी रो लेंगे
दिल में हैं कुछ ज़ख़्म पुराने धो लेंगे
सदार आसिफ़
प्रेमपाप यदि हैइस धरा पर पवित्र फिर क्या होगाजल नहीं थल नहींवायु नहीं गगन नहीं अग्न नहीं
फिर बोलों तुमक्या शिव हृदय पत्थर होगानहीं नहींहोगा करुणा भरा ईश्वरतभी तोशुद्ध हृदय प्रतिबिम्ब उसका प्रेम होगा।
राजेश गौरी
तन्हा जीवन, उदास हम, किस्मत पर कांटे उग आएं हैं,
क्या सुनाएं दास्तान अपनी, अंदर कितने राज़ छिपाएं हैं..!!
टूटे तो बिखर जगाओगे...अंत में तबाह ही हुऐ हैं बिखरने वाले !
सुख में होंगे तो करेंगे खुलासे !अब दुख में क्या तमाशे करू !!
सिर्फ़ जीना मायने नहीं रखता,
सही तरीके से जीना मायने रखता है।
इंसानियत का कद, हमेशा हैसियत से बड़ा होता है...
सब गुज़र तो जाता है,
मगर सब भुलाया नहीं जाता...
माथे पर बिंदी.आंखों पर हया.हायक्या खूबसूरत बला है तेरी हर इक अदा…
जूठ का ज़माना है
सच बोलकर मर जाना यारों !
हम शामों के सताए हुए लड़के
शाम गुज़र जाने के बाद रोते हैं
अपनी रुह का लिबास भी दे दूँगा तुझे…तू मुझमें रहने का पहले फैसला तो कर..!!
उम्र कुछ नही कहती..
कारनामे हैसियत बता देते है..!!
जबरदस्ती की नजदीकियों से ,सुकून की दूरी अच्छी ।
फलसफा जिंदगी का कौन समझ पाया है..
जिया तो वही है, जो मौत से टकराया है...!!
जब मूड ख़राब हो तो
जिंदगी नहीं मौत प्यारी लगती है
पत्थर दिल बनना मेरी मज़बूरी हैअगर मैं बिखर गया तो कोई समेट नहीं पायेगा।।
सबका ख़ुशी से फासला एक कदम हैं ,हर घर में बस एक ही कमरा कम हैं ..
~ जावेद अख्तर