कुछ लोग ठोकर खाकर बिखर जाते हैं…कुछ लोग ठोकर खाकर इतिहास बनाते हैं…!!
इन्सान की ख्वाहिशों की कोई इंतिहा नहींदो ग़ज़ ज़मीं भी चाहिए दो ग़ज़ क़फ़न के बाद
पर्दा जिंदगी का हो या सिनेमा हॉलों काअंधेरों में दिखती है हकीकत उजालों की..!!
सत्य केवल उन लोगों के लिए कड़वा होता है,
जो लोग झूठ में रहने के आदि हो चुके है..!!
ठोकरें खा कर भी न समझे तो मुसाफ़िर का नसीबवरना पत्थरों ने तो अपना फ़र्ज़ निभा दिया था !
किसी से क्या शिकायत करते साहब ,
दिल लगाने की खता तो हमनें भी की..!!
सकारात्मक कार्य करने के लिए हमें
एक सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए।
मत सोचो जिंदगी बोझ है...
खुश रहो क्योंकि समस्या तो रोज है..!!
लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं,
मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है!!
उसके साथ रहो जिनकी तबीयत खराब हो, लेकिन उनके साथ कभी न रहो जिनकी नियत खराब हो..!!
किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए,
बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं।
कभी बदन दर्द, सिर दर्द तो कभी उनकी सांस फूल जाती है,
बेटा अगर प्यार से गले लगा ले, तो मां हर दुख भूल जाती है..
धीरे धीरे सब छोड़ जाते हैं,
दिसंबर तो बस एक महीना है....
ख़्वाहिशे ही तो हैं
मन के भीतर
कितनी मासूमियत से पनपती हैं
उचक उचक कर
शिशु की भाँति लगाती हैं पुकार
पूर्णता को पाने के लिये पैर पटकती हैं
चाहत होती है के सब पा लें
सहज़ ही
मगर कहाँ इतना सहज़ है
इनकी ही तरह सहज़...
कोई चाँद कितना खफ़ा होता होगा,तुम्हें देखता होगा, फिर मान जाता होगा.
जो मुश्किलों से मैंने सिखाया था उस को दोस्त उसने वो इश्क करके दिखाया किसी के साथ
जब सोच में मोच आती है
तब हर रिश्ते में खरोंच आती है. !!
अगर अंधे आदमी को आंख मिल जाए तो वो
सबसे पहले छड़ी फेंकता है जिसने बुरे वक्त में
उसका साथ दिया ...
तुम्हारी यादों के सिक्के…!! रातों में बे आवाज़ बजते हैं …!!
इतवार की सुबहइत्मीनान वालासुकून चाहती हूंकोई हो जग जाएमुझसे पहले मेरे लिएताकि सो सकूँ औरमेरी चिंता कर पाए।कहे सबसे धीरे सेसोने दो उसे ज़राथकी हुई सी आजउसे आराम जी भरतसल्ली से करने दोसोती रहूँ बेफिक्र सेकरे मेरी फ़िक़्र ज़राकहे सब...