खिलाफ कितने हैं क्या फर्क पड़ता है
साथ जिनका है वो लाजवाब हैं
जिस प्रकार अग्नि स्वर्ण को परखती है,
उसी प्रकार संकट वीर पुरुषों को।
किसी का माथा चूमना ही तो प्रेम है
होंठ चुमना तो शारीरिक संबंध हो जाता है
किसी गरीब से ये बड़े शहर के लोगपैसे देकर बहुत कुछ छीन लेते है….!!
व्यक्ति में इतनी ताक़त हमेशा होनी चाहिएकी अपने दुःख अपने संघर्षो से अकेला जूझ सके
जिंदा आदमियों के अंदर,कई बार मारे हुए लोग भी रहते हैं….
सुबह का मतलब केवल सूर्योदय नहीं होता,
यह सृष्टि की खूबसूरत घटना है,
जहाँ अंधकार को मिटाकर
सूरज नई उम्मीदों का उजाला फैलाता है।
हुस्न की क़ीमत कुछ खास नहीं होती
बदन अक्सर ऊंचे दामों में बिकता है !
और फिर मैने उसे जाने दिया..... मैंने सदिया बिताई थी उसकी प्रतीक्षा मे... दिन को दोपहर, दोपहर को शाम , शाम को रात , रात को दिन होने में युग लग जाते हैं ये मैने सिर्फ जाना , नहीं जीया...
ख्वाहिशों ने जब भी कोशिश की उड़ने की,
परिस्थितियों ने "पैरों" में बेड़ियां डाल दिया..!!
विरक्ति
कितना तकलीफ उठाकर कमाते है,,,
जब गाँव से कम उम्र के बच्चे शहर जाते है….
कभी कभी बहुत ग़ुस्सा आता हैं ख़ुद पर ,मैं जैसे हूँ वैसे क्यों हूँ ?
चराग़ों को आँखों में महफ़ूज़ रखना
बड़ी दूर तक रात ही रात होगी
तुम्हारे जाने के बादज़िंदगी के अलग अलग पड़ाव में..हर जगह…हर एक शख़्स के अंदर…ढूंढा मैंने तुम्हें,
फ़िर एहसास हुआ किछोड़ गये हो तुम…सब जगह थोड़ा थोड़ा ख़ुद को
ढूंढा तुम्हें…पर दोबारा कभी तुम मुझे पूरे ना मिले।
जिंदगी की किताब में….सुकून के पन्ने गायब है!!!
शायद तुम्हें कभी पता ना चले...
पर तुम्हारा ख़याल...
तुम्हारी परवाह...
मुझे अब भी है...
मेरी ज़िन्दगी में तेरा साथ कुछ इस तरह से हो,ताउम्र छेड़े तू अपनी अटखेलियों से और हया मेरे चेहरे पर हो..!!
अगर मैं सबके जैसा होता,
तो यकीन करो इतना परेशान ना होता...
बदला लेने में वो मज़ा नहीं जो ,खामोशी से बदल जाने में है …