जो ‘तुम’ ना कह कर ‘आप’ कहेबस इतने पर तो जान लुटा जाए
जीवन में ऐसे लोगों को चुने जो आपको,
मानसिक रूप से स्वस्थ रख सके।
कभी खुदा से मिला तो जरूर पूछूंगा,ग़ुलाब' कितने लगे थे तुम्हें बनाने में...
मेरे प्यार में और इक मुकाम आए
पहले तू कुछ भी हो तुझ में ईमान आए..!!
भरोसें के काबिल नहीं है ये जिंदगी..!!
शिकायत हो या मोहब्बत,अभी कर लो..!!
मज़दूर स्त्रियों के साथ अपने खेत में धान की रोपनी की..!
नेहा सिंह राठौर
मेरी ज़िन्दगी में तेरा साथ कुछ इस तरह से हो,ताउम्र छेड़े तू अपनी अटखेलियों से और हया मेरे चेहरे पर हो..!!
सोच कैसी है ईमान कैसा है
लफ्ज़ बता देते हैं इंसान कैसा है।।
मत पूछ तेरे लिये हम कितना तड़पते थे,
आंसू छिपाकर अपने अंदर से बिलखते थे..!!
ज़िंदगी में एक बार मोहब्बत ज़रूर करनी चाहिए
ताक़ि ये पता चल जाए मोहब्बत क्यों नहीं करनी चाहिए
भारत कृषि प्रधान देश था अब कुर्सी प्रधान देश है !!!
कीचड़ में पत्थर नहीं मारा जातासूखने का इंतज़ार किया जाता है
क्यों डरें ज़िन्दगी में क्या होगाकुछ ना होगा तो तजरूबा होगा
बहुत थे मेरे भी इस दुनिया में अपने,
फिर हुआ इश्क़ और हम लावारिस हो गए ..!!
व्यवहार में सुंदरता रखो लडकियों
चेहरे पर मरने वाले घर नहीं ले जाया करते….!!
चाहे शरीर साथ ना दे या बीमार रहे, फिर भी मजदूरी करता है,
एक पिता घर कि ज़िम्मेदारी, अपनी सांस बेचकर पूरी करता है.
कमाने वाले को पता होता है पैसे कैसे कमाए जाते हैं,
बैठके खाने वाले लोग हाथ का मैल कह देते हैं।
अनवर चतुर्वेदी
इस आजाद भारत के आजाद लोगों ने इतनी आज़ादी पायी है,
कि सरेआम किसी स्त्री को निर्वस्त्र कर उसकी दौड़ करवाई है..!!
प्रीत के पंछी हो,तड़पने से डरते हो?जब बारिश में निकले हो ,तो भीगने से क्यों डरते हो?
_अर्चना शर्मा
एक समंदर
मेरे अंदर
मस्त कलंदर...
उछल रहा है
उछल उछल कर
निगल रहा है
वक्त को
वक्त की बेवजह
पाबंदीओं को…
अंदर के
समंदर से
कभी
वक्त
कहां बड़ा हो पाया ❓
मैंने मुझको
हमेशा
वक्त से
बड़ा पाया
इस लिए
अंदर के समंदर में
वक्त को
डूबता पाया।।