तुम्हारी तपन जला रही है,,,,,
वरना कब के बुझ गए होते ....
इक़ अरसे बाद मिलना हुआ
उसने बस इतना ही पूछा था
आपका मिजाज कैसा है...!
बोल नहीं फूटे बस..आंखे भर आईं
सुलझ भी सकता है झगड़ा उसे कहो कि अभी ,
जुदाई के किसी कागज़ पर दस्तखत ना करें ।।
जो किताबों में है वो सब का हैतू बता तेरा तजरबा क्या है
निदा फ़ाज़ली
पहले तो मोहब्बत से नफरत थी, यहांअब तो दोस्ती से भी नफरत सी हो गईं.
सब नज़र का फेर है रावण की नज़र हो तो,राम भी गलत दिखेंगे.
एक आँसू भी हुकूमत के लिए ख़तरा है
तुम ने देखा नहीं आँखों का समुंदर होना ।
मुनव्वर राना
दुख का प्रतीकशायद रोना नहींमौन हो जाना है !!!
काश तूझे तस्वीरों में ही जी भर के दिख लूं यार
आज ये दिल मुस्कुराने की जिद में है....!!!!
किसी अकेली शाम की चुपी मेंगीत पुराने गा के देखो…
किसी जगह पर पहुँचने के लिए,
किसी जगह से निकलना भी पड़ता हैं...
यकीनन जीत जाते तुमसे वफाओं की बात में, हम तो बस तुम्हारी रंजिशों से हारे थे... बेवजह ही तुमपर ऐतबार किया था ख़ता थी हमारी , के हम तेरे सहारे थे...!!
खयालों के रिश्तें क्या जानें
रूह से जुड़े रिश्ते क्या होते हैं..!!
तब और खिल उठेगा रंग उसकी मेहंदी का,जब मिश्रित उसमें मेरे प्रेम का रस होगा..!!
दर्द का कहर बस इतना सा है,कि आँखें बोलने लगी और आवाज रूठ गई ..
बेहिसाब उधड़ी पड़ी हैं ख्वाहिशों की चादरें
कोई दर्जी सलीखे का शहर में बिठाया जाए!
रथ रावण के पास था
संसाधन रावण के पास थे
सेना रावण के पास थी
सोना रावण के पास था
भगवान राम के पास सत्य था
आशा थी. आस्था थी. प्रेम था.
परोपकार था. विनय था. धीरज था. साहस था.
सदैव नहीं रहती...
काश मै कुछ लिख कर हटा देता ,
मैं लिखता जातिवाद और मिटा देता ...
वास्तव में वह व्यक्ति बुद्धिमान है..जो क्रोध में भी गलत बात नहीं बोलता हैं.!!
सब बीत जाता है
पल हो
दिन हो
महीना हो
या फिर हो साल
जो नहीं बीतता वो है सिर्फ़
तेरा ख़्याल