इरादा है बदलने का तो कोशिश कर बदलने की
अगर सूरज नहीं है तो चराग़ों से उजाला कर
मिलेगी हार या फिर जीत का परचम उठाएगा
नतीजा जो रहे लेकिन नया सिक्का उछाला कर
राघवेंद्र द्विवेदी
शायद इसलिए .."शायरी" इतनी "खुबसूरत" होती है...
कभी सच ..छुपा लेती है तो.. कभी "शख्स".....
एक हंसता खेलता
आंगन मेरा भी था
बलखाती इठलाती
रौनक ऐ जहां मेरी भी थी
पैरों के नीचे जन्नत
कहलवाने वाली माँ भी थी
एक कमजोर सा
बाप का साया था
जो मेरी हर जरूरत में
काम आया था
एक गौरैया दो बोलते...
अगर आँसुओ की किम्मत होती।
तो कल रात का तकिया अरबों का होता।।
तुम्हारी आँखों ने बसाएं रखा है शहर कोई,कोई तन्हा हो सकता है, कानपुर से खफ़ा नहीं,
कर्ता करे न कर सकै , शिव करै सो होय ,
तीन लौक नौ खंड में, महाकाल से बड़ा ना कोय
चेहरे अक्सर झूठ भी बोला करते हैं,
रिश्तों की हकीकत वक़्त पर पता चलती हैं.
अंशुओ का शायद इसीलिए कोई रंग नहीं होता
क्योंकि जब ये आते है तब कोई संग नही होता
काँटों से दिल लगाया है, लहूलुहान होने दो
अभी ज़मीं कहा है बस, उसे आसमान होने दो
आज की पीढ़ी को..
ईमानदार बाप निकम्मा लगता है..!!
किसी के साथ धोखेबाजी करके खुश मत होना...
तकदीर जब तमाचा मारती है तो वो मुंह पर नहीं...
सीधा रुह पर असर दिखाती है...
बड़े दाग हैं,इस सफेद लिबास में भी,कभी पोशाक को क़फ़न सेमिला कर तो देखिए !
थोडी आज़ादी थोडी पाबंदी
थोडा वक़्त थोडी चाहत
थोडे बादल थोडी बारिश
थोडी नादानी थोडी समझदारी
थोडा तुम थोडी मैं
बस और क्या चाहिए ??
मिलकर पूरा हम हो जायेंगे
ना थोडा बचेंगे ना पूरा
दोनों मिलकर आकाश भर में समाएंगे
फिर ख़्वाब सारे हकीक़त...
समझदारी दिमाग में होनी चाहिए,और दिल में बचपना.
कुछ दर्द जो अंदर ही अंदर घुटते रहते हैं, आंखों से पानी बन निर्झर नदियों से बहते हैं । समझ ही नहीं पाती,किसी को नही कह पाती, इस जीवन से अब कुछ और नही चाहती ।
वक़्त ने फसाया है लेकिन मैं परेशान नहीं हूं,
हालातों से हार जाऊं मैं वो इंसान नहीं हूं !
एक दिन ऐसे भी जीना हैं ..
जी भर के पीना हैं ,सारे दुखों को भुला देना हैं ,जब तक होश ना खो दूँ,हाँ ! मुझे भी शराब पीना हैं ..
रिश्ते उन्ही से रखो जो समय आने पर ,
सहयोग और प्यार दिखाए' औकात नही ...
यूँ ही आबाद रहेगी दुनिया,
हम न होंगे, कोई हम सा होगा !
मोहब्बत मार देती है लिखा था एक पन्ने पर,सुना है लिखने वाला भी मरा था इश्क कर के..!!