हम तर्क से पराजित होने वाले नहीं है।
हाँ, यदि कोई चाहे तो प्यार,
त्याग और चरित्र से हमें जीत सकता है।
-रामधारी सिंह 'दिनकर'
असत्य है ईश्वर नहीं मारताउसकी निर्माण सत्ता का भवन नहीं बिखरता एक पिता की मृत्यु परथरथरा कर रेत साधड़ाम से गिर पड़ता हैईश्वरीय सत्ता का भवनऔरप्रत्येक मां की मृत्यु परसंतान दृष्टि मेंमर जाता है ईश्वरक्योंकि मां ही ईश्वर का प्रतिबिंब...
आज ये दिल बेवजह ही खुश हैं
लगता है एक नया दर्द मेरे इंतजार में हैं
अपने मतलब के लिए,अपना बनाते हैं लोग!
ना जाने यह ज़िंदगी कैसे-कैसे इम्तिहान लेती है
फूलों के गुलदस्ते में छुपाकर खंजर जान लेती है
समझौते ही करने होते तो व्यापार करते
ना समझ थोड़े ही है जो तुझसे प्यार करते
हैरत है की हम जैसे लोग भी ठुकराए हुए है
जबकि हम जैसे लोग तो सीने से लगाने के लिए है...
बारिश है ,चाय है ,संग तेरी यादें भी
बस तुम्हारी जगह किताबें आ बैठी हैं..!
मनीषा शर्मा
ज़लील भी करो तो तरीके से,
ये तहज़ीब का शहर है….लफ्ज़ याद रखेगा तुम्हारे…!!
उदासी में कुछ पल जन्नत में जिओगे क्या,चाय बना रहा हूं अदरक वाली पिओगे क्या ?
संघर्ष में तुम अनाथ हो मित्र,
क़ाफ़िला तो सफलता के बाद उमड़ता है!!
घर वाले जब भी कहते हैं कि भाड़ में जाओ तो मैं चुपचाप आकर फेसबुक पर बैठ जाता हूँ.
कभी इसका दिल रखा
और कभी उसका दिल रखा
इसी कशमकश में भूल गए
खुद का दिल कहाँ रखा
गालों पर उंगलियों की छाप
पीठ पर लात जूतों की बरसात
होंठों पर दाँतों के निशान
मुख की कोरों से बहता रक्त
कानों में गूँजती
रिश्तों को शर्मशार करती
हुईं गालियाँ
'उन दिनों'.
उसकी टाँगों के नीचे
आने से मैंने मना क्या कर दिया
बस..
उसने एक चुटकी...
यूँ खामोश रह कर ना सतामाना के हम तेरे तलबी है दूर रहकर परेशान ना कर,,,,,बेचैन दिल को और बेचैन ना कर,इश्क़ करना है तो कर एहसान ना कर..