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नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।

ख़ुश मिजाजी मशहूर हैं हमारी सादगी भी कमाल है हम शरारती भी बेइंतेहा के है तन्हां भी बेमिसाल है

मैंने ख़त लिख रखा है आँखों मेंआप नजर मिलाकर पढ़ो तो सही

किरदार पे अगर बात आई तो याद रखनाबेरहम इंसान के साथ गालियों में PHD करके बैठा हूं

प्रेम की भाषा प्रत्येक जीव समझता है.. आत्मा किसी भी रूप में हो,,..!!

धीरे-धीरे जाने से नहीं डरें। स्थिर रहने से डरें।

कितना तुम कमाल करते हो ,,होठों से ही चूमते हो होठों से ही कौसते हो ।।

धीरे-धीरे हर चीज बेवकूफ लगेगी... जन्म, प्रेम, जिंदगी और आखिरी बेवकूफ़ी मृत्यु। सुसिल ग़ाफ़िल

ख़ुदकुशी को टालकर आया हूँ मैं, हाँ बताओ! क्या ज़रूरी बात है ?

ये वाकया मेरी आँखों के सामने का है,शराब नाच रही थी सारे गिलास बैठे रहे.

लहरों का शोर नहीं, सागर का 'शान्त' सुनो जीवन में कुछ बड़ा करना है, तो एकान्त चुनो प्रह्लाद पाठक

जीवन को बहुत क़रीब से देखने के बाद अब मैं हमेशा तैयार रहता हूँ, जो छूटना है छूटे, जो टूटना है टूटे, मैं अपने दोनों हाथों को हमेशा खुला रखता हूँ, जिसका जब तक मन करे अपना हाथ इन हाथों पर धरे या...

महल मेरा रेत का बनवाते हो और पता बारिश को देते हो....!!

कुछ मन्नतें पूरी होने तकवफादार रहना ऐ जिंदगीबहुत अर्जियां डाल रखी हैमैंने उम्मीदों के दामन में

लगता होगा चांद बहुत खूबसूरत है ,मगर लोगों ने तुम्हें देखा ही कहां है ।।

फूंक डालुंगा मैं किसी रोज दिल की दुनिया,ये तेरा खत तो नहीं है जो जला ना सकूं !

नुमाइश करने से बढ़ नही जाता इश्क़, इश्क़ वो भी करते है जो इज़हार नही करते।।

चिंता से चतुराई घटे, दु:ख से घटे शरीर। पाप से लक्ष्‍मी घटे, कह गये दास कबीर।।

'आज का प्रत्येक संवेदनशील व्यक्ति प्रेम का भूखा है।' ~ मुक्तिबोध

आपकी अकड़ अभी जवा हुई हैं कल परसों में ,हमारे तेवर बगावती है वर्षो से…


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