दिल पर तो बहुत ज़ख़्म ज़माने के लगे हैंख़ुद-दारी से लेकिन कभी रोया नहीं जाता
पहरे मिरे होंटों पे लगा रक्खे हैं उस नेचाहूँ मैं गिला करना तो बोला नहीं जाता
~ अज़हर नय्यर
आग लगाऊं मैं तेरी डिग्रियों को, एक मेरा दिल तुझसे पढ़ा ना गया..
ख़्वाब ख़्वाब ही रह गया ,
जिंदगी ने कुछ यूं हिसाब किया..!!
अगर होता दिलों के पास कोई कान,तो आँखों की ख़ामोशी भी सुनी जाती.!
हमसफ़र वक़्त को बदलने वाला होना चाहिए,
वक़्त के साथ बदलने वाला नही….!!
व्यापार या व्यवहार उन लोगों से रखो
जिनकी जान से ज्यादा जुबान कीमती हो..
हम नफरत भी हैसियत देखकर करते है,प्यार तो दूर की बात है !!!
स्वार्थ मनुष्य के व्यवहार में शामिल होता है ,
बारिश रुक जाने के बाद छाता भी उसे बोझ लगने लगता है …
हर इंसान अपनी जबान के पीछे छुपा है ,अगर उसे जानना है तो उसे बोलने का मौका दो …
वृक्ष के समान बनो जो कड़ी गर्मी झेलने के बाद भी सभी को छाया देता है।
महाकवि कालिदास
ग़ैरों की बात छोड़िए, ग़ैरों से क्या गिलाअपनों ने क्या दिया हमें, अपनों से क्या मिला।
~ कैफ़ी आज़मी
भेदभाव देखें तो चुप न रहें।
चुप रहना बढ़ावा देना है।
कफ़न मेरा हटा कर मुझे बार-बार देखोगी,तुम्हें मेरी मौत पे यकीन ही नहीं आयेगा...
जितना ज्यादा तुम उसे बाहर ढूंढते हो, उतना ज्यादा ही वो तुम्हारे अंदर होता हैं पढ़ लो चाहे दुनियां का कोई भी ग्रंथ, इश्क़ और ईश्वर हमेशा ऐसे ही तो मिलता हैं!
पिता के अलावा और कोई नहीं चाहता ,
कि आप उससे ज्यादा तरक्की करे ..!!
काश एक शायरी कभी,तुम्हारी कलम से ऐसी भी हो,जो मेरी हो मुझ पर हो और,बस मेरे लिए ही हो..!!
तेरा इश्क़ मुझे ले गया खुदा के करीबतुझे पाने की जिद्द में मैंने सजदे बड़ा दिए
ना कोई शिकवा ना कोई गम
जब जैसी दुनिया तब वैसे हम
आज मेरी कॉल न उठाने वाले,कल को….ये आवाज़ नहीं होगी तो पछताओगे.