sj_coat_512x512_web

World's Best Cow Hospital

ना देवरानी जेठानी कि कोई लड़ाई ना कोई गृह कलेश था, एक ही चूल्हे में बनता था खाना, ऐसा भारतीय परिवेश था..!!

बड़ा अजीब खेल खेलता है खेलने वाला दिन भर बारिश में भीगता रहा छाता ठीक करने वाला

टमाटर का भाव खाना एक बार समझ आता हैं, लेकिन अदरक शक्ल ना सूरत फिर भी 200 रू किलो...शायद इसलिए ही इसे कूटा जाता है..

नहीं मांगती प्राण प्राण में , सजी कुसुम की क्यारी स्वप्न स्वप्न मे गूंज सत्य की , पुरुष पुरुष मे नारी रामधारी सिंह दिनकर

संघर्ष भी उन्हीं को चुनता है, जिनमें लड़ने की क्षमता होती हैं।

सत्य के लिए किसी से भी नहीं डरना गुरु से भी नहीं मंत्र से भी नहीं लोक से भी नहीं वेद से भी नहीं

अक़्ल कहती है दोबारा आज़माना जहल है, दिल ये कहता है फ़रेब-ए-दोस्त खाते जाइए..!!

सबने कहा अच्छे से जाना सिर्फ मां ने कहा बेटा घर जल्दी आना

सूरत देखकर नहीं सीरत देखकर हमसफर ढूंढना , क्योंकि बुढ़ापे में अच्छे चेहरे नहीं सहारे काम आते हैं...!!

करवट बदल रही थी ज़िन्दगी, मेरे सारे ख्वाब टूट रहे थे, समय तेजी से बढ़ रहा था आगे, पर हम पीछे छूट रहे थे..!!

सबको लगता है खुश हूं मैसब के सब धोखे मे है…

तूने जो ना कहा मैं वो सुनती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही जाने किसकी हमें लग गई है नज़र इस शहर में ना अपना ठिकाना रहा दूर चाहत से मैं अपनी चलती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही ....

अंदर का ज़हर चूम लिया धुल के आ गए, कितने शरीफ़ लोग थे सब खुल के आ गए.

कभी खुदा से मिला तो जरूर पूछूंगा,ग़ुलाब' कितने लगे थे तुम्हें बनाने में...

"तुम कर लो नजरंदाज अपने हिसाब से""हम तो इश्क़ मोहब्बत बेहिसाब करेंगे"

समय हर समय को बदल देता है... बस समय को थोड़ा समय चाहिए..!!

पहले ख़ुद पर ध्यान दो…बाद में दूसरों को ज्ञान दो … !!!

बेरोज़गार के लिए, रोज़गार ही त्योहार होते हैं…

हैरत है की हम जैसे लोग भी ठुकराए हुए है जबकि हम जैसे लोग तो सीने से लगाने के लिए है...

गिद्धों कि तरह नोचा है अस्मत भी उनकी लूटी है, इस देश में यत्र नार्यस्तु पूज्यंते कि सारी रस्में झूठी हैं, और राम करे रक्षा सीता की, कृष्ण द्रौपदी का चीर बढ़ाते हैं, कलयुग के हैं देव विलुप्त इसलिए सब "नं'गा नाच" कराते...


Concept, Created & Designed by sureshjain.com


© copyright 2025. sureshjain.com All Rights Reserved.

Translate »