किसी के चेहरे की हँसी से उसके दर्द को भी महसूस करो , सुना है लोग हंस - हंस के खुद को सज़ा भी देते हैं ..!!
नहीं पढ़ीं जातीं सम्पूर्ण कविता अब उनसे'दो' पंक्तियाँ दो उन्हें, किताबें वापस ले लो।
तुझमें उलझ गईं हूं मैंये उलझनों के धागे कभी सुलझे ना
हाल ए दिल क्या बया करेंबीन तेरे मुझे कुछ गँवारा नहीं..!!
मुझसे मेरे मिजाज़ का आलम न पूछिये ,
क़ातिल को ख़ुद दिया है हमने कलेजा निकाल के ..!!
अपमान से भरी गुलामी की जिंदगी से तो मौत हजार गुना अच्छी है ।
भगत सिंह
मिल जाता है सुकून उनकी तस्वीर देख कर,कुछ शख़्स हमारी ज़िंदगी में ऐसे भी होते हैं..!!
हम नास्तिक लोग इस धरती को स्वर्ग बनाना चाहते हैं,
और आस्तिक मूर्ख लोग काल्पनिक स्वर्ग के चक्कर में,
इस धरती को नर्क बना रहे हैं।।
हर दर्द का इलाज नही दवाखानेकुछ दर्द चले जाते हैंदोस्तों के साथ मुस्कुराने से …!!
क़िताब सादा रहेगी कब तक।....
कभी तो आगाज़ -ए- बाब होगा।.....
जिन्होंने बस्ती उजाड़ डाली।......
कभी तो उनका हिसाब होगा।.....
प्रेम से विरह उत्पन होता है।विरह से दर्द होता है।दर्द से तड़प, तड़प से प्राथना होती है।प्राथना से भक्ति,भक्ति से ध्यान लगता है।ध्यान से परमात्मा,परमात्मा से संतुष्टि मिलती है।संतुष्टि से चैन और चैन से प्रेम मिलता है।
इंतज़ार मत करो
जो कहना हो कह डालो
क्योंकि हो सकता है
फिर कहने का कोई
अर्थ न रह जाए।
ज़िंदगी जोड़ घटाव से नहीं, प्रेम और लगाव से है।
सबको मेरे बाद रखियेगा.. आप सिर्फ़ मेरे हैं,याद रखियेगा…
बदनाम तो बस हमारे वहां के लोग हैंवरना माल फूंक के तो सारे काम करते हैं
मरना तो है ही,
अपने मनुष्यत्व और अधिकार के लिए मरो !
अखबार सी हों गई है जिंदगी
हर रोज़ नई ख़बर
घाव के ठीक हो जाने से,हादसे भूले नहीं जाते...
तुम जहां रहो खुश रहना बेटा मैं अपना काम चला लूंगा…
कोई पूछेगा तो व्यस्त है बच्चा कह के इज्जत बचा लूंगा…
हाथ पांव चलते रहेंगे तो बस कुछ साल और निभा लूंगा…
पैसा जरूरी है भविष्य के लिए मैं सब को यह...
जिद और जूनून चाहिये जीतने के लिये..
हारने के लिये तो आपका डर ही काफी है..!!