मोहब्बत में ऐसे दीवाने हो जाओ कि 4 लोग बोले , एक ही शख्श था क्या इस सारे जहां में...
चश्मदीद अन्धा बना, बहरा सुने दलील
झूठों का है दबदबा, सच्चे हुये ज़लील
बदले बदले से सब हुज़ूर नज़र आते हैं
चुनाव तक कौन कौन वही रह जाते हैं।
जिंदा आदमियों के अंदर,कई बार मारे हुए लोग भी रहते हैं….
ये कलयुग है साहब यहाँ क़सम खाने वाले नहीं,दारू पीने वाले सच बोलते है !!
न जी भर के देखा न कुछ बात की
बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की
यूँ तो हर शाम उमीदों में गुज़र जाती हैआज कुछ बात है जो शाम पे रोना आया
~ शकील बदायुनी
जिंदगी का सबसे खूबसूरत एहसास है.."किसी की खुशी का कारण बनना"…..!!
नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
बारिश तो और बढ़ गई, लगता नही आज थमेगी.
बरस जाएगी तो, अपने आप थम जाएगी...
गुलज़ार
दिल का मामला है तो,दर्द से बनाकर रखिएगा हुज़ूर!किसी-न-किसी मोड़ पर,ठोकर ये खाएगा ज़रूर !
दुनिया समझ में आई मगर आई देर से,,कच्चा बहुत था रंग उतरता चला गया..!!
ये गर्मी भी बिल्कुल तुम्हारे ही जैसी है……आजकल सुबह भी तुम्हारे जैसी है,थोड़ी तपिश तो थोड़ी चमक सी है,और सुबह के बाद शाम का इंतजारबिल्कुल तुम्हारे इंतजार के जैसा बेसब्री सा
मोहब्बत में कहाँ कोई उसूल होता है❤️❤️दिल जिसे चाहे बस वही कुबूल होता है
कुछ सास ससुर भी अपनी बहुओं की,
खिदमतगारी का उपहार अनमोल देते हैं,
खुद कि बेटी चाहे जैसे रहे ससुराल में,
मगर बहू गलत करे तो मां बहन तौल देते हैं..!!
विरक्ति
आखिर कब तक किस्सा बनके रहोगे ,
जल्दी से हिस्सा भी बनजाओ मेरी जिंदगी का ..!!
कोशिश करा करो सच बोलने की,झूठे रिश्ते ही टूटेंगे, इंसानियत का धर्म नही…
आदत रही है हमारी दिल पर अकेले राज करने की, हम उनके नहीं होते जिनके दिल में हजारों कि भीड़ हो..!!
क्यूं सोचें, के चार लोग क्या कहेंगे?
समाज में महज़ चार लोग थोड़ी है।
तुम्हारी यादों की मंडी ऐसे लगती है मेरे ख्वाबो में,मानों कब से हमने कुछ ख़रीदा ना हो।"