बड़ी तलब लगी पड़ी है मुस्कुराने की,तुम जो चले जाओं तो कुछ बात बने ….
रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था
तानों की भट्ठी में तपा आदमी,
राख नहीं सोना बनता है....
सुनो ये हकीक़त बहोत पुरानी है
चाय आज भी दिल की राजधानी है...
अगर सोने का हिरण चाहेगी सीता
तो बिछड़ जायेंगे उसे राम ये तय है
चौदह वर्ष वनवास रहा
एक एक रात कटी रोते रोते
तब जाकर बार समझ में आई
सोने के हिरण नही होते
ये मत समझ की तेरे काबिल नहीं हम, तड़प रहे हैं वो जिसे हासिल नहीं हम...!
जिस पर आकर हो जाते हैं कत्ल मेरे लफ्ज़ ,,
उसकी खुशी मैं हम अपनी ग़म भूल बैठें..!!
फिर यूँ हुआ कि वक़्त ने मसरूफ़ कर दिया ,
वरना हमारे पास ज़माने के ख़्वाब थे ।।
मेरे रोने कि तू परवाह ना कर, अब हालातों से लड़ लेता हूं,
तब अश्कों से थे खून बहे, अब खामोशी से रो लेता हूं..!!
विरक्ति
कुछ इस तरह लगना तुम गले मुझ से,
कि छीन लेना मन की उदासियां सारी .!
कुछ सवालों के जवाब बड़ी ख़ामोशी सेबह जाते हैं आँखों के कोरों से
छुपा दिये जाते हैं उनके सूखे हुए दागभीगे हुए मन के रूमालों में
अभी हम उठे ही कहाँ जो तूफ़ान देखेगा
इक दिन झुक के हमें आसमान देखेगा
अम्बष्ठ
अब जो है, कुछ भी नहीं है हमारातेरा ख़्वाब आख़िरी था इन आँखों में_!!
है कोई जिससे तेरी यारी ना हो,आदमी इतना भी बज़ारु ना हो,
मुझ से भी हो कर वो आगे बढ़ चुका,दोस्त बच के, अब तेरी बारी ना हो ।
जब तू मुस्कुराने की वजह बन सकता हैं,
तो रोने की क्यों नहीं .. ??
मुझ जैसी आफत में तुम्हारी शराफत कम पड़ जायेगी,मुझसे ज्यादा बात करोगे तो मेरी आदत पड़ जायेगी
जिस घर में बेटा नहीं होता उस घर में बेटी,
बेटा बन के मां बाप का ख्याल रखती है !!
दुनियां उन्हीं से हाल पूछती है,जिनकी हालत ठीक होती है…
"तेरा हर नज़र-ए-अंदाज पसंद है मुझे" "बस एक नज़र अंदाज करना पसंद नहीं"
बात सह गए तो रिश्ते रह गए
बात कह गए तो रिश्ते ढह गए