हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती
“कितनी सुंदर बात है की……“तुम्हारी प्रतिक्षा में बिता समय……“कभी व्यर्थ सा नहीं लगा…!!
कुछ दरमियाँ नहीं हैं तो बेचैनियाँ है क्यों ,
कुछ रिश्ते बेरुखी से भी नहीं टूटा करते ..
कुछ लोग आपसे सीखकर,
आपको ही सिखाने लगते हैं....
जज्बातों का भी बाजार थाये जरा तब समझ आया ,एक रोज हम वहां चले गए ,जहां ये शामें लगा करती थी।।
ख़ैर अच्छा तो कुछ नहीं , पर जो हैं सही हैं ...
धर्म से बड़ा देश होता है। मातृभूमि होती है। सिख धर्म में बाल कटवाना वर्जित है, लेकिन अपने देश के लिये मैं बाल तो क्या गर्दन भी कटवा सकता हूँ। ~ शहीद भगत सिंह
बहुत महंगा पड़ता है वो रिश्ता, जिसमे खुद को सस्ता कर दिया जाए...
तू बन जा गाली बनारस की मैं शाम तलक..
सफर मुस्किल है मगर काटेंगे अकेले ही..!
दुनिया में 70 % पानी हैलेकिन सबको इश्क़ में डूब कर मरना है…!!
मैं जिंदगी से भागना नहीं,
उससे जुड़ना चाहता हूं....
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें,जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें,शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें !
हमेशा दूसरों को हँसाओ दुसरो को मनाओ, कभी कभार खुद को भी पूछ लेना चाहिए कि तुम्हारा हाल कैसा है...
अगर तुम कहो तो मैं खुद को भुला दूं,तुम्हे भूल जाने की ताकत नही है.
ख़ामोशी को चुना है मैंनेक्योंकि बहुत कुछ सुना है मैंने!
ये गांधी का देश है लेकिनइसी देश में अंग्रेजों ने फूट डाले, शासन किए
जरूरतें, ख्वाहिशे, ज़िम्मेदारियां, यूंही तीन हिस्सों में दिन गुज़र जाता है..
वही फिर मुझे याद आने लगे हैंजिन्हें भूलने में ज़माने लगे है
गरीबी पर शायरी लिखने बैठा था ,
कमबख्त कलम ही रो पडी।।