राम-राम के जाप में तेरे,
पहले सा आराम नहीं,
जबरदस्ती के जय श्री राम में,
सब कुछ है बस राम नहीं
पैसे कमाते कमाते खुद कागज बन जाते हैं,
सिर्फ़ बेटियां ही नहीं बेटे भी घर छोड़कर जाते हैं।
आधुनिकता के नाम पर नंगे हो रहे हैं तन
इसका मतलब जानवर कहीं हमसे आगे है
जिस दिन हम अपनी हद पार करेंगे,
तुम्हे तेरी सल्तनत से भी उठा लाएंगे !!
थोड़ी आँच बची रहने दो, थोड़ा धुआँ निकलने दो
कल देखोगी कई मुसाफ़िर इसी बहाने आएँगे
उनको क्या मालूम विरूपित इस सिकता पर क्या बीती
वे आये तो यहाँ शंख-सीपियाँ उठाने आएँगे
रह—रह आँखों में चुभती है पथ की निर्जन दोपहरी
आगे और बढ़ें तो...
मोहब्बत कोई नौकरी नहीं जो फ़र्ज़ की तरह निभाई जाए,इबादत हैं, मंदिर के बाहर भी निभती रहती हैं !
कुछ सास ससुर भी अपनी बहुओं की,
खिदमतगारी का उपहार अनमोल देते हैं,
खुद कि बेटी चाहे जैसे रहे ससुराल में,
मगर बहू गलत करे तो मां बहन तौल देते हैं..!!
विरक्ति
रामचंद्र कह गये सिया से ऐसा कलयुग आएगा,देश में होगी भुखमरी, बेरोज़गारी वो उसे ही विकास बतलायेगा
आदमी जब थक जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैआदमी जब उब जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैआदमी जब टुट जाता हैस्त्री को ढुँढ़ता हैइसे दुसरे तरीके से कहें तोथके टुटे और उबे हुऐ आदमी कोसिर्फ स्त्रीयॉ बचाती हैं..!!
बहुत महंगा पड़ता है वो रिश्ता,जिसमे खुद को सस्ता कर दिया जाए…
हालात इंसान को वो बना देते हैं,
जो वो कभी था ही नहीं....
यदि आप कॉकरोच को मारते हैं तो आप नायक हैं,
यदि आप तितली को मारते हैं तो आप बुरे हैं।
नैतिकता के सौंदर्य मानक होते हैं।
फ्रेडरिक नीत्शे
गुलशन के निगहबानो हम को न भुला देना
कुछ ख़ार भी लाज़िम हैं फूलों की कहानी में
ऐ दीदा-ए-तर तुझ को मालूम नहीं शायद
बह जाते हैं ख़्वाब अक्सर अश्कों की रवानी में
मुझको न गिनाओ मेरी कमियां क्या हैं,
जाओ .....आईना देखो ..
और अपने गुनाह गिनो..!
स्वर्ग के सम्राट को खबर कर दो,
रोज ही आकाश चढ़ते आ रहे हैं हम..
मैं क्यों मान लूं तुम नहीं हो मेरे हाथ की लकीरों में, किस्मते तो उनकी भी होती है ना जिनके हाथ नहीं होते
ढूँढोगे तो सुकून खुद मे ही मिलेगा..दूसरो मे उलझन मिलती है....
कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है,
जिन्हें हम अभिमान वश अज्ञानी समझते हैं।
ख़ुश मिजाजी मशहूर हैं हमारी सादगी भी कमाल है
हम शरारती भी बेइंतेहा के है तन्हां भी बेमिसाल है
तर्क किये बिना किसी भी बात को आँख मूंदकर मान लेना भी एक प्रकार की गुलामी है
भगत सिंह