जितनी शिद्दत से तुझे चाहा था
तूझे भूलने में उतनी ही ज़हमत उठानी पड़ रही है..
तुमने तोड़ा है इतने टुकड़ों में मुझे तुम क्या जानो खुद को समेटने में कितनी मशक्कत उठानी पड़ रही है..
ना रातों को चैन है ना दिन...
ये संवाली रंगत सादा हुलिया उदास आंखें
हम से जो कोई दिल लगाए तो क्यों लगाए!!
रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था
हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती ।
रिश्तें गर बंधे हो “दिल” की डोरी से
तो दूर नहीं होते किसी भी “मजबूरी” से....!!
होंगे तुम्हारे शहर में तुम्हारी खूबसूरती के चर्चे ,
हमारे गांव में तो हमारी सादगी मशहूर है...
इतिहास लिखने के लिए कलम नही हौसलो की जरूरत होती हैं..!!
सिर्फ़ पोस्ट पढ़ने का ही रिश्ता न रखिए हमसे...
कभी चाय+नाश्ते के लिये भी बुलाया करो हमें..!!
सुलह कराने में लगा हूं
दिल और दिमाग के बीच
दिल मानता नहीं
दिमाग सोंचता नहीं
कुसुरवार दोनों हैं
दिल स्वीकारता नहीं
दिमाग जानता नहीं
मुद्दा जो था वो रहा नहीं
जाने से पहले दोनों से कुछ कहा नहीं
इतेफाक से तो नही हम दोनो टकराए कुछ तो साजिश खुदा की भी होगी
शहर में रहकर...वो सोशल मीडिया पे फादर्स डे का जश्न मना रहा था, उधर गांव मे एक बूढ़ा बाप आज भी टकटकी लगाए बैठा है !!
कितने शिकवे हैं ज़िंदगी के साथ, फिर भी मरने को दिल किसी का नहीं करता !
खामोशी जुर्म है इस दौर में बोलना सीखो..
वरना मिट जाओगे हालातों के तूफानों में..!!
प्रेम से विरह उत्पन होता है।विरह से दर्द होता है।दर्द से तड़प, तड़प से प्राथना होती है।प्राथना से भक्ति,भक्ति से ध्यान लगता है।ध्यान से परमात्मा,परमात्मा से संतुष्टि मिलती है।संतुष्टि से चैन और चैन से प्रेम मिलता है।
'विद्या' सबसे अनमोल ‘धन’ है,
इसके आने मात्र से ही सिर्फ अपना ही नहीं,
अपितु पूरे समाज का कल्याण होता है।
- ईश्वर चंद्र विद्यासागर
वक्त बहुत ही कीमती चीज होता है जनाबकभी इसको फालतू कार्यों में बर्बाद ना करें..
जोर बाकी नहीं उड़ान में क्यावर्ना रखा है आसमान में क्या
हिम्मतें जब एक जुट हो जाती हैं...
तभी मुसीबतें अकेली पड़ जाती हैं..!!
कुछ लोग आँसू रोकते हैंबेहिसाब रोकते हैइसलिये नहीं कि वे मजबूत होते हैं
बल्कि इसलिये किउनके पास कमजोर कंधों का कारवां होता है…!!
छोटी छोटी चीजों में खुशी ढूंढना सीख लो, जरूरत पड़ने पर अपना हाथ खुद पकड़ना सीख लो।