महादेव के दरबार में सबकी समस्याओं का हल है,
कीमत केवल सच्ची आस्था और एक लोटा जल है..!!
मुद्दतों बाद उठाए थे पुराने काग़ज़.. साथ तेरे मिरी तस्वीर निकल आई है..!!
अंदाज कुछ अलग है अपने जीने का।लोग रुलाना नहीं छोड़ते, हम हँसना नहीं छोड़ते
पद और पैसे से कितने भी अपराध छुपा लो साहब,
किसी गरीब की बद्दुआ तुम्हे सुकून से जीने नहीं देगी...
इन्तज़ार मत करो
जो कहना है कह डालो
क्योंकि हो सकता है
फिर कहने का कोई अर्थ न रह जाय...!!
पैसों के अलावा अब किसी के
आने जाने से फर्क नहीं पड़ता।
खुद की पहचान बनाने मे जो मजा हैं,
वह किसी की परछाई बननें मे कहा हैं यारों...
इतिहास और वर्तमान साक्षी हैं
युद्ध का प्रमुख कारण सदैव भूमि और धर्म ही रहा है
हर बात पर शुक्र करना ये भी अल्लाह पाक की
नेमत है, कयोंकि अल्लाह पाक शुक्र करने की
तौफीक उन्हीं को देता है, जिससे वो राजी होता है
क्या मनाउ होली..
कैसे मनाउ जश्न...
जब फिलिस्तीन के..
बच्चो के जिस्म पर है..
खुन निकलता जख्म
आप बस किरदार हैं अपनी हदें पहचानिएवरना फिर एक दिन कहानी से निकाले जाएंगे
अपनी क्या फिक्र करें, हम जिंदा हैं वही काफी है...
क्योंकि नहीं मिलते विचार तुम्हारे हमारे, अलग अलग रास्ते से क्यों ना पहुंचे हम मंज़िल तक
मकानों को घर मे तब्दील करने वाली स्त्रियांकरती हैं अनगिनत सब कुछ हर बारअपने आत्मसमान को दांव पर लगाकरफिर भी पाती है तिरस्कार अक्सर उन्हीं अपनों से जिनके लिए वह सबकुछ करती है
कई बार हम जिस परिस्थिति से बचना चाहते हैं , उसी परिस्थिति में हमारे लिए क़ीमती सबक़ छिपा रहता है …
मुझे लगता है कि ज्यादातर लोग अन्याय के बारे में तभी सोचते हैं जब उनके साथ गलत होता है।
चार्ल्स बुकोव्स्की
सफ़र छोटा ही सही यादगार होना चाहिए ,
रंग सांवला ही सही वफादार होना चाहिए।।
व्यस्त हूं , मस्त नहीं....
कौन है दोस्तों ऐसा यहां ,
जिसे कोई कष्ट नहीं..!
हर तरफ़ ज़ीस्त की राहों में कड़ी धूप है दोस्तबस तेरी याद के साये हैं पनाहों की तरह
एक लात पड़ी थी तो पूरा देश सर पर उठा लिया
गर्दन कट गई तो सन्नाटा है...!
इस सन्नाटे को में क्या नाम दू....?
पुराना विवाद
आपसी रंजिश
पैसे की लेती देती
या फिर....
भाई चारा....
या फिर....
दलाली....???