तकदीरो में नही था मेरे वो शख्सजो मेरे हाथो से अपने हाथो की लकीरें मिलता था
दो रोटी के वास्ते, मरता था जो रोज ।
मरने पर उसके हुआ, देशी घी का भोज ॥
इश्क के भी देखो कितने अजीब फसाने हैं,,,,,, जो हमारे नहीं हम उन्हीं के दीवाने हैं,,,,,,
एक दिन मैंने खुद की तलाशी ले ली ,जो कुछ मिला वो अपना था पर अपना लगा नहीं!
कइयों को देख गुज़रा हूँतुझको को देख ठहर गया…..!!
हालात चाहे कैसे भी हो मुस्कुरा लेते है
बच्चे खुश रहे तो भूखे पेट भी आंसू छिपा लेते है
कभी मीनारो से गिरते है कभी मलबे मे दब जाते है
कभी गटर मे गिरते है कभी बेमौत मर जाते है
मजबूर भी है मजदूर...
धैर्य की अपनी सीमाएँ हैं अगर ज़्यादा हो जाए तो कायरता कहलाता है।
चाणक्य
ना धन चाहिए तुझसे ना दौलत चाहिए,
मेरी मां मुझको बस मन कि शुद्धि चाहिए,
और बिन मांगे बहुत कुछ मिल चुका है तुझसे,
बस नियत संभाल सकूं, इतनी बुद्धि चाहिए..!!
तमीज़ बताती है परवरिश आपकी, आप पढ़े लिखे हैं तो क्या हुआ
जिंदगी में इतने काबिल बनो कोई ये,ना बोल दे, कि मेरे बिना तेरा क्या होगा।
कोई व्यक्ति कितना ही ख़ास क्यों न हो,
उसे एक पल में त्यागने कि क्षमता तुम्हारे भीतर अवश्य होनी चाहिए।
तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहींएक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
~क़तील शिफ़ाई
एक ही शख्स समझता था उसे,
और एक ही शख्स समझता था मुझे !!
फिर ये हुआ की वो भी समझदार हो गया,
और हम उसके सामने बच्चे ही रह गये !!
अपनी ज़िंदगी में खुद रोशनियां पैदा करो,यकीनजानो तुम्हारे अलावा तुम्हारा कोई भी वफादार नही है ...
मत पूछ किस बेरहमी से कत्ल हुआ था मेरा,मोहब्बत के ज़र्फ़ में उतारकर पिघलाया गया था मैं..!!
आप किसी को तभी तक प्यारे लग सकते हो
जब तक आप उसके लिए उपयोगी हो।
मेरी ख्वाहिशों का शहर बहुत बड़ा थापर अब जिम्मेदारी की गलियों में अटक गया हूँ
उन हसीन चेहरों पे लानत,
जिनके दिल स्याह और सोच गलीच हो।