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जिद्दी बनना सीखो.. क्योंकि हर चीज क़िस्मत में नहीं लिखी होती..!!

सफ़र छोटा ही सही यादगार होना चाहिए , रंग सांवला ही सही वफादार होना चाहिए।।

अच्छा इंसान तो अपने जुबान से ही जाना जाता है,वरना अच्छी बातें तो दीवारों पर भी लिखी होती है..!!

ज़िंदगी के सफ़र में नुक़सान बस इतना हुआ जो वहम था अपने हैं' वो सिलसिला ख़त्म हुआ.!

मैं क्या बताऊँ कैसी परेशानियों में हूँ काग़ज़ की एक नाव हूँ और पानियों में हूँ भारत भूषण पन्त

आज से लक्ष्य पर धयान दूंगा दिशा खुद मिल जाएगी

वक़्त चलता गया पानी के नज़ारों की तरह चाहे कितना किया कश्ती से किनारा हमने याद है शाम वो ठहरी तेरी पहली वो नज़र तब से खोई है हर इक साँस हमारी हमने

शीत लहर के स्पर्श से जब मन झंकार उठा मधु कूक कोयल से जब हृदय में ज्वार उठा तब शब्द हार पहन विरही मन मुख से कविता गान उठा

तुम सिर्फ सोचो और वो मिल जाएजिंदगी इतनी सस्ती चीज नही है !

सुना है, घर के कई टुकड़े हो गए।अच्छा! अच्छा! ,बच्चे बड़े हो गए।।

खुद में झांकने के लिए जिगर चाहिएदूसरों की बुराई करने में हर शख्स माहिर होता है!

सस्ती लोकप्रियता की चाह और पैसों की भूख सरेआम संस्कारों के साथ साथ जिस्म को भी नंगा करती है।

लोग देखतें हैं तमाशा सिक्का फेंक केसड़कों पे मजबूरी करतब करवाती है एक दिन मर जाना है माना सबको मगरफिर क्यों ये आग पेट कि हर रोज जलाती है

बिगड़ेल है ये यादे,देर रात को टहलने निकलती है…..!!

मैं इज़हार करूं तो ना भी हो सकती हैं, तुम करो तो हां की जिम्मेदारी मेरी ...

"माँ थी अनपढ़ लेकिन उसके पास गीतों की कमी नहीं थी कई बार नये गीत भी सुनाती रही होगी एक अनाम ग्राम-कवि" आलोक धनवा

जिंदगी में गम बहुत है,खुलासा मत होने देना, लबों से मुस्कुरा देना,मगर तमाशा मत होने देना..!!

अगर मां-बाप तुम्हारी वजह से खुश हूं,तो अपनी जिंदगी के बादशाह हो तुम..!

वो आइने में कैसे बर्दास्त करती होगी खुद को, उसे तो धोखेबाज लोगो से सख्त नफरत थी..

कहते हैं जीते हैं उम्मीद पे लोग,हमको तो जीने की भी उम्मीद नहीं !


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