वो चीज़ जिसे सुकून कहते हैं, हम भूल गए हैं कहीं रखकर...
और धीरे धीरे मैंने ये मानना शुरू कर दिया,
कि मैं किसी के लायक नही हूं अकेली ही ठीक हूं..!!
खुश रहने का बस एक ही मंत्र है
उम्मीद बस खुद से रखो किसी और इंसान से नहीं।
अब्दुल कलाम
कृष्ण में लीन मीरा
कृष्ण-प्रेम में मग्न है रहती
सुधबुध है खोई अपनी
बावरी कृष्ण-भजन में डूबी रहती
दरस की अभिलाषी मीरा
विष को भी अमृत मान है पी लेती
मोह कहाँ है उसे इस जग से
हर साँस वो गिरधारी को समर्पित करती
ऐसी है दर्श दिवानी...
अफ़सोस इंसानियत को भुला कर इंसानइंसानियत दिखाने का ढोंग बहुत करता है
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमेंऔर हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
~फ़िराक़ गोरखपुरी
धैर्य की अपनी सीमाएँ हैं अगर ज़्यादा हो जाए तो कायरता कहलाता है।
चाणक्य
इंसान तो हर घर में जन्म लेता है मगर,इंसानियत कहीं कहीं ही जन्म लेती है…!!
मेरी दोस्त ने अभी कहा - ये जो लड़कियां होती है ना, इनसे आप थोड़ा दूर रहा करिए!….इनके पास रोने के सिवा कुछ नहीं होता.
इसीलिए कहता हूं कि इंतजार मत करोजो कहना है करना है आज ही कर डालो,इंतजार करने मे कभी कभी बहुत देर हो जाती है ।
तन को सौ बंदिशें , मन को लगी न रोक तन की दो गज कोठरी , मन के तीनों लोक !!
मौन और एकांत आत्मा के,
सर्वेत्तम मित्र हैं....
सफर मुस्किल है मगर काटेंगे अकेले ही..!
सोचती हूँ मेहनत की कलम से.... ज़िंदगी की कहानी फिर से लिखूं...!!
“ये फ़र्ज़ रहे ध्यान में,लिखा है संविधान में,अगर कोई भी बात,तेरा मन गई कचोट कर,तू वोट कर,ये प्रश्न तेरे बल का है,सवाल तेरे कल का है,समय ये फ़ैसले का फिर से,आ गया है लौट कर,तू वोट कर”
पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोइ।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़ै सो पंडित होइ॥
कबीर दास
जिन्हें दूरबीन लेकर बुराई ढूँढ़ने का शौक़ है , उन्हें आईना पकड़ा देना चाहिए ...
अज्ञानता हमेशा बदलाव से डरती है !
पंडीत नेहरु
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जिंदगी की जंग में वही जीतता है.... जो हर परिस्थिति में चलना जानता है...!!