सब बीत जाता है
पल हो
दिन हो
महीना हो
या फिर हो साल
जो नहीं बीतता वो है सिर्फ़
तेरा ख़्याल
फासले और बड़ा लो एतराज़ कब किया हमने ,
तुम भी ना भूल सकोगे वो अंदाज़ हूं मै ..!!
हमनें दुआ में मांगा जिन्हें,
उन्हीं की बद दुआ से बर्बाद हुए हैं !
खफा नहीं हूं तुझसे ए जिन्दगी..
बस जरा दिल लगा बैठा हूं इन उदासियों से..!!
बेटियों को तितली नहीं,मधुमक्खी बनाओ पंख दो पर डंक भी दो...
मुझे पल भर के लिए आसमान को मिलना थापर घबराई हुई खड़ी थी…कि बादलों की भीड़ में से कैसे गुज़रूँगी…
बच्चे ने तितली पकड़ कर छोड़ दी
आज मुझ को भी ख़ुदा अच्छा लगा।
अज़ीज़ इतना ही रक्खो कि जी सँभल जाएअब इस क़दर भी न चाहो कि दम निकल जाए
ग़लतियाँ उसकी क्या गिनाऊँ मैं
इक कसर छोड़ी नइँ सताने में
क्या उस गली में कभी तेरा जाना हुआजहाँ से ज़माने को गुज़रे ज़माना हुआमेरा समय तो वहीं पे है ठहरा हुआबताऊँ तुम्हें क्या मेरे साथ क्या-क्या हुआम्म हम्म, खामोशियाँ एक साज़ हैंतुम धुन कोई लाओ ज़रा….
अपनी उदासी मुझे दे दे ,
मेरे हिस्से का तु मुस्कुराया कर।
ये सरासर गलत है कि मेरा कोई पता नहीं
दरअसल मुझे ढूंढने की हद तक कोई ढूंढता नहीं !
माँ ' समझदारी' और पिता ' जिम्मेदारी' के सबसे श्रेष्ठ ज्ञाता है।
सब नज़र का फेर है रावण की नज़र हो तो,राम भी गलत दिखेंगे.
वे भगवान हैं जिनको हमनें माँ के रूप में पाया है
उनकी गोद स्वर्ग है तो आँचल आख़िरी छाया है
खुद को शरीफ बस इतना ही रखो, जितना आपके साथ दुनिया रहे !
मनचाहे शख्स के पास ,
सारे जहां का सुकून होता है...
आपका गिरना एक हादसा हो सकता है...
मगर वहीँ पड़े रहना आपकी मर्ज़ी है ..