जिंदगी ने यूँ उधेड़ा बुन न पाये,चाह थी क्या, क्या मिला हम चुन न पाये.
छिन जाती है "मासूमियत" चेहरे की,मुफलिसी "उम्र" देखकर वार नहीं करती..!!
मन्नतों के धागे बांधो या बांधो मुरादों की पर्चीवो अपना नम्बर देगी तभी जब होगी उसकी मर्जी
खामोशी से मतलब नहीं, मतलब तो बातों का हैदिन तो गुजर जाता है, मसला तो रातों का हैं!!
जूते घिसकर बनाई गई पहचान और ,
जूते चाटकर बनाई गई पहचान मे फर्क होता है ...
अपने पैरों पे खड़े होकर मरना..
घुटने टेक के जीने से कही बेहतर है..!!
गहराई ढूंढते है मेरे शब्दों में अब तुम..मैने दरिया में उतरना ही छोड़ दिया…
घर में पड़ी दरार जब भरती नहींदीवार बन कर उठ खड़ी होती है।
नींदें वापस कर दी हमने,,सुकून भरी रातों को।
किताबों के संग ' हर रात बितानी थी, आँखों को।।
सेजल
स्त्री और मिस्त्री से,
टकराने का मतलब घर का नक्शा बिगाड़ना।
दर्द आदत है सुकून चाहत है,
ये जिंदगी एक आफत है।
कागज🦋
तू जहां तक दिखाई देता है..
उसके आगे मैं देखता ही नहीं..
मैं निभाता रहा वफ़ा वो धूल झोंकती रही,
फना करके मेरी रूह मुझे दफन करती रही..!!
जो उन मासूम आँखों ने दिए थे, वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ
एक हमारे उठने से क्या होता है,
आंख दुनिया की भी तो खुलनी चाहिए...
बचपन कि छोटी खुशियां थी, मस्ती, हंसी ठिठौली थी, मिलता अब वो आह्लाद नहीं जो देती आंख मिचौली थी..!!
जो कभी अपने पापा से ठीक से बात नहीं करते वो लोग भी आज फ़ोटो लगाकर #FathersDay की बधाई देंगे
मायूस भी नहीं है वो और खुश भी नहीं है, क्या बात है जो दिल को मजधार में ले आई.. रफ़्ता रफ़्ता खत्म हुए हम जो तेरे इश्क़ में अफसोस है कि मौत क्यों इक बार में न आई.. तुझे...