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मुझको मजबूर न कीजिएगा अदाकारी पर , मैं जो किरदार में उतरा तो क़यामत होगी ..!!

खामोश लोग सबसे तेज़ दिमाग रखते हैं ...

लग गई आग उन मकानों में जिन मकानों में कभी रहते थे, आपसे और क्या कहें साहिब कल भी रोते थे अब भी रोते हैं।

आंधियों को आख़िर ज़िद छोड़ना पड़ादम उनका निकाल दिया इक चराग़ ने

मैं बेरागी हूं… महादेव नहींपर तुम्हारी काया से अधिक तुम्हारी आत्मा को चाहूंगा..! मैं प्रेमी हूँ… कान्हा नहींपर तुम्हारे नाम को सदैव अपने आगे लगाऊंगा..! मैं मर्यादित हूं… श्रीराम नहींपर तुम्हारे अलावा मैं किसी और का न हो पाऊंगा..!

अभी तो कहानी शुरू हुई है, अभी मेरा किरदार तो बाकी है !

निगाहें आज भी उनकी याद में बेचैन रहती हैं, ये दिल उदास रहता है जुबां खामोश रहती हैं, जब मयस्सर दीदार उनका ख्वाब में होता है, तब नींदें हराम होती हैं आंखें रो पड़ती हैं..!! विरक्ति

"मुझे भी सिखा दो वादों से मुकर जाना, बहुत थक गया हूँ निभाते निभाते".......!!

जिसे देखो वो दुःखी है .. आखिर ये खुशी जा कहां रही है ...

मैं ढूंढती हूं खुद में...खुद को ही,शायद मैं वो नहीं जो हुआ करती थी..!!

अचानक आ जाती है मृत्यु की ख़बरअचानक डूब जाता है शहरअचानक ढह जाती हैं इमारतेंअचानक चुभ जाता है कांटाअचानक फैल जाती है आग जंगल में सारी त्रासदियां अचानक आती हैंनहीं आता कभी कोई सुख अचानकजैसे तुम कभी नहीं आयी। ~गौरव गुप्ता

फर्ज़ बनता है "छोटो" का! कि उन्हें, समझाया जाएबड़े, बड़े हैं! मतलब ये नहीं कि गलत नहीं हो सकते

उम्र बढ़ती, प्यार बढ़ता, अरमां जवां और दुनिया हसीन हो जाती, तुम झरोखे से कुबूल कर लेती मुझको, तो जन्नत अधीन हो जाती !

जब बात जरूरत की हो, तब लहज़े सबके मीठे हो जाते हैं....

सिर्फ मेरा दिल ही जानता है कि ये तुम्हें खोने से कितना डरता है

कभी कभी बहुत ग़ुस्सा आता हैं ख़ुद पर ,मैं जैसे हूँ वैसे क्यों हूँ ?

राजा की जान 🦜 में है..

चार दिन बाज के ना उड़ने से आसमान कबूतरों का नहीं होता.!!

कुछ लोग भूलने के नहीं, बल्कि दफनाने के काबिल होते हैं...

सफल इतने बनो कि तुम्हे,पराजित करने के लिए प्रयास नहीं छल करना पड़े।


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