ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मींपाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है
जिंदगी में हर मौके का फायदा उठाओ
लेकिन किसी के विश्वास का बिल्कुल नहीं...
पीड़ा, अवसादों से रिश्ता जोड़कर, नाता खुशियों से तोड़ा था,
मोहब्बत में रूह को फना करके, मैंने अपनी जान निचोड़ा था..
सब से पहले दिल के ख़ाली-पन को भरना,पैसा सारी उम्र कमाया जा सकता है.!
गुज़रता हुआ वक्त क्या क्या सिखा देता है.….. कभी हँसना तो कभी रोना सिखा देता है वक्त है कभी जहर पीना तो,कभी जख्म सीना सिखा देता है...!
"वक्त की पाबंदी सभ्यता की पहली निशानी है…।"
तुम ने तो सितारों को दूर ही से देखा है,तुम समझ न पाओगे आसमां की तनहाई…
अक्लमंद और बेवकूफ इंसान मे कोई फर्क
नही ये दोनो किसी के बाप की नही सुनते..!!
भाई को डांटती हुई बहन से खूबसूरत दृश्य भला और क्या हो सकता है
तारीफ़ें दिन बनाती हैं और ताने ज़िन्दगी।
हर लड़का जिस्म नहीं मांगता, हर लड़की पैसे पर नहीं मरती, कुछ रिश्ते लोगों की सोच से ज्यादा पवित्र होते हैं
न दिन होता है अब न रात होती हैसभी कुछ रुक गया हैवो क्या मौसम का झौंका थाजो इस दिवार पर लटकी हुई तस्वीरतिरछी कर गया है….
संस्कारों में बस इतने बने रहना,कि कोई परवरिश तक ना पहुंचे…
रास्ते जो भी चमक-दार नज़र आते हैंसब तेरी ओढ़नी के तार नज़र आते हैं
कोई पागल ही मोहब्बत से नवाज़ेगा मुझेआप तो ख़ैर समझदार नज़र आते हैं
~ ज़ुबैर अली ताबिश
खुशी का हर लम्हा पास होता है जब पिता साथ होता है
हैप्पी फादर्स डे
इस बरस भी फिर से वहीं मलाल रह जाएगा
हाथो में तेरे नाम का गुलाल राह जाएगा!!
निभाने वाले मनाया करते हैं,
छोड़ा नहीं करते ...
चालाकी,
चतुराई
और
बेशर्मी
के मिश्रण को
आजकल होशियारी कहते हैं!!!
बेटे खुश ना भी हों तो कौनसा, घर वालों को पता चलने देते हैं....