अगर आज भी लगता हैं आपको की गलती मेरी थी,तोमैं माफ़ी मांगने के लिए तैयार हू,बस आपको साबित करना हैं।
मैं रोज सुबह
कभी देर रात आता हूं
तुम्हारे शब्द पंखों के कोमल भावों को
कभी ओढ़ता कभी बिछाता हूं
प्रेम आपको डांट कर सुला देता है,
हवस रात भर जगाए रखती है.
मेरे दोस्तों सामने हो मंजिल तोरास्ते ना मोड़ना जो भी मन में हो वो सपना मत तोड़ना कदम कदम पर मिलेगी मुश्किल आपको बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना
कभी कभी ऐसा क्यों लगता है तू मेरा होकर भी जुदा सा क्यों लगता है ?माना तेरी भी कुछ मजबूरिया है पर ये तों बता ये जो तेरी हर आहट का इंतजार करता है ये शक्श आखिर तेरा क्या लगता...
मन्नतों के धागे बांधो या बांधो मुरादों की पर्चीवो अपना नम्बर देगी तभी जब होगी उसकी मर्जी
ज़िंदगी की कुछ कमियां,,सिर्फ़ मजबूर नहीं,,मजबूत भी बनाती है।
~ कीर्ति चन्द्रा
ना मंदिर कि बात होगी ना शिवालय की बात होगी,प्रजा बेरोज़गार है निवालों की बात होगी
अब तो इस राह से वो शख़्स गुज़रता भी नहीं
अब किस उम्मीद पे दरवाज़े से झाँके कोई
परवीन शाकिर
गाँव को छोड़ के हम शहर कमाने आए
अब ये एहसास हुआ जान गँवाने आए!
गहराई ढूंढते है मेरे शब्दों में अब तुम..मैने दरिया में उतरना ही छोड़ दिया…
मसला सकून का है जान,
वरना जिस्म बाज़ार में भी मिलता है...
छोडने की लाख बुराई होने के बाद भी रुकने की एक वजह ही प्रेम होती होगी शायद
इश्क़ में दो की संख्या आखरी होती है, तीन की जलन आप नहीं समझ सकते.
कठिनाइयां मनुष्य को जितना सीखा सकती हैं..
दस गुरु मिलकर भी उतना नहीं सीखा सकते.!!
लोग परखते है मुझे मेरी बातों से,काश कोई समझे मुझे मेरे जज्बातों से।
मितरों 20 मिनट तक सांस रोक कर रखो,
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आपकी 'महबूबा' आपके कदमों मे होगी !
खामोश रहोगे
तो
सच परेशान भी रहेगा
और पराजित भी होगा ।
अपनी इच्छाओं को सत्यापित करने के लिए अपने शब्दों को सत्य बनाओ
मैं जानता हूं कहाँ तक उड़ान है उनकी,
ये मेरे हाथ से निकले हुए परिंदे है..