अपनी ताकत का परिचय तब दीजिए,
जब सामने वाला आपको कमजोर समझने लगे।
लोग खुद पर ध्यान नहीं देंगेलेकिन दूसरों को ज्ञान जरुर देंगे….!
हमें हार नहीं माननी चाहिए और समस्या को हमें हराने की अनुमति नहीं देनी चाहिए"
डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम
तूफ़ानों से आँख मिलाओ, सैलाबों पे वार करोमल्लाहों का चक्कर छोड़ो,तैर के दरिया पार करोफूलों की दुकानें खोलो,ख़ुशबू का व्यापार करोइश्क़ ख़ता है तो ये ख़ताएक बार नहीं सौ बार करो।
जिसके साथ दादा-दादी का प्यार है
वही तो दुनिया का खुशकिस्मत इंसान है
एक दिन जियूंगा अपने लिए भी ,
ये सोच कर पिता ने सारी उम्र गुज़ार दी ।।
जिंदगी में सिर्फ पहली बार,
इतना ही कहा है मैंने
बहुत मजबूत रिश्ते थे,
बहुत कमजोर लोगों से...!
आदत अकेलेपन की जो पहले अज़ाब थी ,
अब लुत्फ बन गई है अज़ीयत नहीं रही ।।
पिता का क्रोध कदापि आपका अवरोध नहीं,
सही मार्ग पर चलने का अनुरोध है।
समय से भी ज्यादा महंगी भावनाएं होती हैं ,
जो समझे उसी पर खर्च करो
जब वजूद में 'माँ' मिलती हैतो सारी पीड़ाएँ नष्ट हो जाती हैंऔर मुझमें 'माँ' शेष रह जाती है।
-नेहा यादव
लोग हत्या होते देख लेते हैं प्रेम होते नहीं देख पाते....!!
मोहब्बत की उम्र में जिंदगी, संघर्षो मे उलझी है।
किताबों के बीच गुलाब नही, आज भी 'कलम' रखी है।।
पता है मुझे ऐ ज़िन्दगी
कदम कदम पर
तू मुझे रुलायेगी
मगर याद रख
तेरे ज़ुल्मों सितम की उम्र है छोटी
मेरे होंठों की हंसी से
तू पल पल मात खायेंगी
अहंकार की...सबसे बड़ी खराबी यही है कि...यह कभी भी इन्सान को..महसूस नहीं होने देता कि... वह गलत है...
कुछ तो तेरे मौसम ही मुझे रास कम आए
और कुछ मेरी मिट्टी में बग़ावत भी बहुत थी
दर्द छुपाते छुपाते,दर्द में जीने की आदत हो गई।
दुनिया समझ में आई मगर आई देर से,,कच्चा बहुत था रंग उतरता चला गया..!!
माथे पर बिंदी.आंखों पर हया.हायक्या खूबसूरत बला है तेरी हर इक अदा…
मैंनेगुलाब कीमौन शोभा को देखा !उससे विनती कीतुम अपनीअनिमेष सुषमा कोशुभ्र गहराइयों का रहस्यमेरे मन की आंखों मेंखोलो !मैं अवाक् रह गया !वह सजीव प्रेम था !मैंने सूंघा,वह उन्मुक्त प्रेम था !मेरा हृदयअसीम माधुर्य से भर गया !