गुजरता है मेरा हर दिन, मगर पूरा नही होता,
मैं चलता जा रहा हूं, और सफर पूरा नही होता…!
हाथ में चाय और यादों में आप हो….फिर उस खुशनुमा सुबह की क्या बात हो..!!❣️
तुमसा कोई प्यारा,कोई मासूम नही है,क्या चीज हो तुम, खुद तुमको मालूम नही है
जिस घर में बेटा नहीं होता उस घर में बेटी,
बेटा बन के मां बाप का ख्याल रखती है !!
हमें ऐसी शिक्षा चाहिए जिससे चरित्र का निर्माण हो,
मन की शक्ति बढ़े,
बुद्धि का विकास हो
और मनुष्य अपने पैर पर खड़ा हो सके"
स्वामी विवेकानंद
रूह में बसा हुआ शख्स,दिल से कभी नहीं निकलता….
मुझे मौत का खौफ ना दीजिए
मौत भी "शर्म से मुंह छुपाए" बैठी है.......
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"मौत" भी मुझे इतना, तड़पा ना पाती
जितना "ज़िंदगी मुझे तड़पाए" बैठी है.....!!
किसी रात कभी ऐसा भी हो,हम म'र जाएं, उसे खबर न हो.
दीप मंदिर के हों या दरगाह के,
हम फक़त रौशनी ही चाहते हैं.
उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है,परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है ।मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँ,मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी
मैनें खुद को भी पढ़ कर देखा है..
सिवाये भरोसे और यकीन के कोई खता न था...
यदि आप कॉकरोच को मारते हैं तो आप नायक हैं,
यदि आप तितली को मारते हैं तो आप बुरे हैं।
नैतिकता के सौंदर्य मानक होते हैं।
फ्रेडरिक नीत्शे
लड़खड़ाये कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे , आखिर हमारा पीना ही आज हमारे काम आया
उम्मीद पर ज़ीना ,
जीने की आखिरी उम्मीद है..!!
तुम्हें छूकर मैंने जाना
किसी रेलगाड़ी के गुजरने पर
धरती कांपती क्यों है।
तुम्हें चूमकर मैंने जाना
छूइमूई के पौधे का रहस्य।
तुम्हारे आलिंगन से मैंने जाना
चन्द्रमा पर प्रथम मनुष्य होने का एहसास।
तुमसे प्रेम करके मैंने जाना
मछुआरे और मछली के बीच...
बहुत कम लोग जानते हैं
कि वो बहुत कम जानते हैं
जिंगदी तू भी यूं बेवफा निकलीशिद्दत से चाहा मगर तू भी गैरो सी निकली
दे कर लबो पर ख़ुशी मेरेदिल में बेइंतेहा दर्द क्यों दे के गयी..!!
नौकरी नौजवानों के
जीवन का वह श्रृंगार है,
जिसके बिना समाज
का कोई भी अंग उन्हें सम्मान
की दृष्टि से नहीं देखता है।
बातें बंद होने से, मोहब्ब्त खत्म नहीं होती ..!
संभलना था हमें,, साथ फिसलते चले गए,, ना चाहा फिर भी,, उसकी चाहत में संवरते चले गए,, अंज़ाम मालूम था,, फिर भी आगे बढ़ते चले गए,, तिनका तिनका जोड़ा था ख़ुद को,, दूरियों में बिखरते चले गए,, अब तकलीफ़ ये...