मेरी चीखों कि खामोशियां बड़ी जालिम हैं,
धड़कन रोक कर उतारती हैं आंसू हलक में..!!
ज़िंदगी की धूप-छाँव में,
संघर्ष है, सफ़र है, जीने का अद्भुत अंदाज़ है।
हम वहाँ हैं जहाँ से हम को भी
कुछ हमारी ख़बर नहीं आती
जली को आग कहते हैं,बुझी को राख कहते हैं।और जो अंधभक्तों के पास नहीं हैउसे दिमाग कहते हैं
कुछ आस थी कभी, कभी कुछ वहम था
एक दरिया सा और एक विशाल सागर सा
वो आस भी ले डूबी और वहम भी ले डूबा
कभी गहरी आग सा तो कभी गहरे पानी सा ...
दूसरों की आंखों में आंसू लाने वाले ये क्यों भूल जाते हैंकि भगवान ने दो आंखें उन्हें भी दी हैं और कर्म समय चक्र के साथ घूमकर एक दिन हमारे समक्ष अवश्य आते हैं।
दो नावों पर सवार था‚
उसकी ज़िन्दगी का सफ़र;
मैंने ख़ुद की ...
बहुत से पति पत्नी सिर्फ इसलिए
साथ रहते हैं क्योंकि वो पति पत्नी हैं...
एक सामाजिक बंधन है
सात फेरे लिए है
उन तमाम संस्कारों को पूरा किया है
जो शादी के लिए जरूरी हैं...
अब यहां प्रेम है या नहीं....
इसकी कोई गारंटी नहीं....
"जिंदगी में इतना काबिल बनो" कि भगवान किसी गरीब की मदद करने के लिए तुम्हारी जेब का इस्तेमाल करें !
महीनों बाद आज फिर देखा उसे,एक बार तो दिल धड़का मगर फिर संभल गया !!
पैर ज़मीं पर रखकर आसमां में उड़ना चाहती हैं
ये बेटियाँ कुछ नहीं चाहती, बस जीना चाहती हैं।
भर जाएंगे जब ज़ख्म तो आऊंगा दोबारा
मैं हार गया जंग मगर दिल नहीं हारा
मस्तमौला होकर जीना अपनी ज़िन्दगी,तुम परेशानियों से मत हारना,ज़िम्मेदारी कितनी भी परत चढ़ा दे सिलवटों की,कभी अपने बचपन को मत मारना..!!
वो हमारे परिवार का दुःख कैसे समझेगा जिसका अपना कोई परिवार ही नहीं है !
दर्द में मुस्कुराओ,
क्योंकि दर्द में लोग अक्सर मजाक उड़ाते हैं...!!
किताबें पढ़ो तो औरते कमजोर,
और दीवारें पढ़ो तो मर्द कमजोर...
पुरुष कोई भी दुःख सहन कर सकता है,परंतु उसके घर का क्लेश….
उसकी आत्मा को निचोड़ कर रख देता है…!!
जाने वाले ने सिखाया है,
आने वाले को औकात में रखना…!!
तुझे नहीं आएंगी मुफ़लिसी की
मुश्किलात समझ,
मैं छोटे से घर
का बड़ा हूँ .......
मेरी बात समझ !!
जिनके ऊपर जिम्मेदारियों का बोझ होता है
उनके पास रुठने और टूटने का वक्त नहीं होता..