चाहता था मैं, वफा का सिला..🦋मगर वो भी जख्मों में ही मिला
||एक तो वो इतनी हसीनऊपर से चाय की शौकीन…||
ये नफ़रत नहीं फितरत है मेरी ,
जिसे छोड़ दिया मतलब छोड़ दिया...
**एक इश्क़-बाजाँ,बे-हिसाब दर्द दे गयाबे-रहम क़त्ल करदिल-ख़ूनी कर गया।।
अंकिता
जिन्हें आप पसन्द करते हैं,
उनका बूँद भर भी आपको सागर नज़र आता है ;
जो आपको पसन्द करते हैं,
उनका सागर भी आपको बूँद बराबर लगता है।
शाम को तेरा हस के मिलना..दिन भर की तनख्वाह है मेरी...!!
शेरों के साथ संगत बनाइए..
कुत्तों के साथ बैठने से आप सिर्फ पीठ पीछे भोकना ही सीखेंगे..!!
दिल में नहीं हम सीधे रूह में उतरते हैं,
जब भी करते हैं मोहब्बत बेशुमार करते हैं
सदा जो दिल से निकल रही हैवो शेर और नगमों में ढल रही हैकी दिल के आंगन में जैसे कोईग़ज़ल की झांझर छनक रही है
गुस्सा करना अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है,क्योकि आप जिसपे गुस्सा करते है,उससे ज्यादा आपका खुद का नुकशान हो जाता है !
सूरज, सितारे, चाँद मेरे साथ में रहें,जब तक तुम्हारे हाथ मेरे हाथ में रहें,शाखों से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम,आंधी से कोई कह दे की औकात में रहें !
फरक नहीं पड़ता दुनिया क्या सोचती है,मैं अच्छा हूँ ये मेरी माँ कहती है !
घर की जिम्मेदारियों से जब दब जाओगे,
क्या असर करती है चाय समझ जाओगे।
कहानी ख़त्म हुई और ऐसी ख़त्म हुई कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते हुए
दो पल सुकून में खोके आते है
फुरसत हो तो चलो "बनारस" होके आते है।
इतिहास और वर्तमान साक्षी हैं
युद्ध का प्रमुख कारण सदैव भूमि और धर्म ही रहा है
किसी की निंदा करने से, यह पता चलता हैं की ,
आपका चरित्र कैसा हैं न कि उस व्यक्ति का आचरण ...
हालात बिगड़ने लगे तुम बिछड़ने लगे
हम दोनों को हालातो से लड़ना था,
तुम हमसे लड़ने लगे
अल्फ़ाज़ नर्म पड़ गए और लहज़ा बदल गया,
लगता है कुछ ज़ालिमों का इरादा बदल गया…!!
रंगों में रंगों को मिलने तो दो
फूलों से दिल को खिलाने तो दो
आई है फिर से रंग भरी होली
है ये रंग गौरी नहीं बन्दूक की गोली
तो आओ रे.....
खेलों तुम सब होली रे
भर लो ये तुम आज प्रेम रंग...