World's Best Cow Hospital

अब भी पूरा भरा है मेरे भीतर तेरे जाने के बाद का ‘ख़ालीपन’

कफ़न मेरा हटा कर मुझे बार-बार देखोगी,तुम्हें मेरी मौत पे यकीन ही नहीं आयेगा...

इंसान की ये आदत है ना मिले तो सब्र नही करता और मिल जाये तो कद्र नही करता..

आप ऐश कीजिए जेब में रखीं दौलत से , मैं तो झोले में इंसानियत रखकर खुश हूं ।।

तन्हा जीवन, उदास हम, किस्मत पर कांटे उग आएं हैं, क्या सुनाएं दास्तान अपनी, अंदर कितने राज़ छिपाएं हैं..!!

वो ज़माना अब नहीं रहा दोस्तों,जब लोगों को किसी से बिछड़कर अफ़सोस होता था।

तुम्हें गुरुर है तुम्हारा वक्त बोल रहा है! हमें यकीन है हमारा सब्र बोलेगा!!

किसी को उजाड़ कर बसे तो क्या बसे.. किसी को रूला कर हंसे तो क्या हंसे..!!

हजारों बातें दिल में दफन करके , अब खामोश रहना पसंद है मुझे ..!!

युद्ध का ज्वालामुखी है फूटताराजनैतिक उलझनों के ब्याज सेया कि देशप्रेम का अवलम्ब ले !किन्तु, सबके मूल में रहता हलाहल है वहीफैलता है जो घृणा से, स्वर्थमय विद्वेष से !युद्ध को पहचानते सब लोग हैंजानते हैं, युद्ध का परिणाम अन्तिम...

लहज़े में उद्दंडता, खून में उबाल,जुबां पर ज़हर, अक्ल कम थी,आयी जब ज़िम्मेदारी तोमुंहपर झूठी मुस्कान और आंखे नम थी

भाई मौसम, इतना रोमांटिक मत होंकुछ लोग अभी भी सिंगल हैं

जब बच्चे ने काग़ज़ खाया तो माँ ने डाँटा, बच्चे ने रो कर कहा माँ काग़ज़ पर रोटी बनी थी।

मैं रोज सुबह कभी देर रात आता हूं तुम्हारे शब्द पंखों के कोमल भावों को कभी ओढ़ता कभी बिछाता हूं

मूर्ख से बहस करना गाल पर बैठे मच्छर को मारने जैसा है, मच्छर मरे या ना मरे पर आपको थप्पड़ ज़रूर लगेगा।

आसमां को गुरूर था कि वो सबका मुकाम हैबारिश को मगर जमीं ही रास आई!

भरे बाजार से अक्सर मैं खाली हाथ आया हूँ , कभी ख्वाहिश नहीं होती कभी पैसे नहीं होते ।।

फूल जैसी होती है , वफ़ा की तासीरख़त्म होते ही , मिट्टी में अपनी खुशबू छोड़ जाती है …

मैं तुम्हारे साथ हूॅं कहने में और रहने में बहुत फर्क होता है !!

निगाहें आज भी उनकी याद में बेचैन रहती हैं, ये दिल उदास रहता है जुबां खामोश रहती हैं, जब मयस्सर दीदार उनका ख्वाब में होता है, तब नींदें हराम होती हैं आंखें रो पड़ती हैं..!! विरक्ति


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