ये इश्क़ नहीं आसां इतना ही समझ लीजे
इक आग का दरिया है और डूब के जाना है
जिगर मुरादाबादी
यह जिस्म होता हैतो सब कुछ ख़त्म हो जाता हैपर चेतना के धागेकायनाती कणों के होते हैंमैं उन कणों को चुनूँगीधागों को लपेटूँगीऔर तुम्हें मैं फिर मिलूँगी…
~ अमृता प्रीतम
इस दुनिया में असंभव कुछ भी नहीं ,
हम वो सब कर सकते हैं जो हम सोच सकते हैं !
तेरी आँखें नीले आसमान को लज्जित कर देती हैं,
तेरा मुस्काना फूलों को भी फीका कर देता है।
तेरे बालों की लहरों में, समंदर भी खो जाएगा,
तेरी आवाज़ से बुलबुल की चहचहाहट फीकी पड़ जाएगी।
तू है अपनी खूबसूरती में बेमिसाल।
तुझमें सारी सुंदरता...
परिवार, हालात और रिश्ते जो संभालना चाहता है,वही झुक जाता है,वर्ना स्वाभिमान तो सुदामा का भी कहाँ कम था।
हालात इंसान को वो बना देते हैं,
जो वो कभी था ही नहीं....
कमियाँ हैं तो रहने दो साहब
खुद को खुदा थोड़ी बनाना है..
ज़ुबान और दिमाग़ तेज चलाने से ,रिश्तों की रफ़्तार धीमी पड़ जाती है …
बात नहीं हुई सुबह, सुबह नहीं हुई सुबह से सीधा दोपहर हो गई….
जिसके लिए थे हम बहुत खासउसी ने बना दिया ज़िंदा लाश…!!
एक हमारे उठने से क्या होता है,
आंख दुनिया की भी तो खुलनी चाहिए...
दरिया आँखों में था फिर भी प्यास रहीज़िन्दगी भर ज़िन्दगी की तलाश रही
पवित्रता किस को रास आती है यहाँ जनाब ,
सब के सब "जिस्म"के कीचड़ में "इश्क़"ढूंढते हैं.
मेरी ज़िन्दगी में कुछ ऐसे लोग भी आए जो साथ बैठ कर हंसते थे...और मेरे पीठ पीछे मुझे ही डसते थे..!!
सुनो लड़कियों घर से भागो
प्रेमी के साथ नहीं।
इतिहास
भूगोल
विज्ञान
साहित्य की किताबें लेकर,
जब इन किताबों को सीढ़िया बनाकर
मारियाना की गर्त से लेकर,
चांद पर पहुंच जाओगी।
तब कोई भी प्रेमी भगाएगा नहीं
बल्कि
ख़ुद ही चोरी छिपे किताबें देगा
बजाय फूल और झूठी प्रसन्नता के।
मेरी जिंदगी मै खुशियां तेरे बहाने से है, आधी तुझे सताने से है आधी तुझे मनाने से है।
उड़ान वालो उड़ानों पे वक़्त भारी है,परों की अब के नहीं हौसलों की बारी है ।मैं क़तरा हो के तूफानों से जंग लड़ता हूँ,मुझे बचाना समंदर की ज़िम्मेदारी