सदा जो दिल से निकल रही हैवो शेर और नगमों में ढल रही हैकी दिल के आंगन में जैसे कोईग़ज़ल की झांझर छनक रही है
भीड़ में सभी लोग अच्छे नहीं होते..
और अच्छे लोगों की कभी भीड़ नहीं होती..!!
अभी भरा नहीं था गम पति के जाने का,
उससे पहले रिश्तेदारों ने बेघर कर दिया,
भरे नहीं थे घाव एक मां कि चूड़ी टूटने के,
बच्चा बड़ा होने से पहले उन्हें लावारिस कर दिया..!!
और फिर मैंने
सफर को ही हमसफ़र बना लिया
🖤
उन रिश्तों का खत्म हो जाना ही बेहतर है, जहां दुख और अपमान के सिवा कुछ न मिले...
बड़ी कस केबांधे रक्खी है मुझेयादें तेरीबिछड़ना मुझे भी नहीइन से…..
सफल होने के लिए तुम्हें,
खुद की दुनिया में कैद होना पड़ेगा...
ये दुनियाँ अगर मिल भी जए तो क्या है …..
मंज़िल चाहें जो भी हो मेरी, रास्ते आप ही से होकर गुजरते हैं..!!
कुछ साल सुखों को ताक रखना पड़ेगा खुद को खुद की औकात पर रखना पड़ेगा।नीदें तुम्हें हर रात सुला देना चाहेंगी मगरतुम्हें पहरा किताब पर रखना पड़ेगा ।।
सच की तपस्या से बेहतर है, झूठ से सन्यास ले लिया जाए.
जब वक्त बुरा हो तो ‘मेहनत’ करना
जब वक्त अच्छा हो तो ‘मदद’ करना
रुतबा रोब का होना चाहिए,
अकड़ तो कुत्ते की पूंछ में भी होती हैं…
घड़ी नहीं मेरा समय खो गया हैखुद से मिले एक अरसा हो गया है!
जीतता वह हैजिसमें शौर्य, धैर्य, साहस, सत्व और धर्म होता है।
~ हजारी प्रसाद द्विवेद
कभी गोधूलि बेला मेंघंटा ध्वनि से तुम आ जाओ….🌿
साल भर पहले, पहला ‘मकान’ लिया
तुम्हारे साथ ने उसे ‘घर’ किया
आखिर में ज़िंदगी चंद सवाल,
और कुछ जवाब बनकर रह जाती हैं...
हारकर अपनी तक़दीर से,अवसादों के बीच भंवर में खोया था, जब मौत मांग रही थी ज़िन्दगी,मैं सिसक सिसककर रोया था.
बोले हुए अल्फाज़, गुजरा हुआ वक्त,
टूटा हुआ भरोसा, कभी वापस नही आता...