World's Best Cow Hospital

है कोई जिससे तेरी यारी ना हो,आदमी इतना भी बज़ारु ना हो, मुझ से भी हो कर वो आगे बढ़ चुका,दोस्त बच के, अब तेरी बारी ना हो ।

मकानों को घर मे तब्दील करने वाली स्त्रियांकरती हैं अनगिनत सब कुछ हर बारअपने आत्मसमान को दांव पर लगाकरफिर भी पाती है तिरस्कार अक्सर उन्हीं अपनों से जिनके लिए वह सबकुछ करती है

हम अकेले रहने वाले लोग किसी को साथ देख कर क्यूं जलेंगे..

तेरे मन को न भाया तो क्या करोगे, में याद ही ना आया तो क्या करोगे; ये किस्सा वो नग्मे वो आए हुए खत, में इन कहानी में ना समाया तो क्या करोगे_।।

अच्छा सुनो तुम इश्क की बातें न किया करो मासूम हैं हम, तेरी बातों से बहक जाते हैं..

कंपटीशन इतना बढ़ गया है कि अगर हम किसी को अपना दुःख बताते हैं तो वो हमसे ज्यादा बताने लगता है।।

बादलों की ओट से सूरज निकलने वाला है सफर जारी रखो, वक्त बदलने वाला है। यशवर्धन जैन

गांव की मिट्टी के पले बढ़े हैं,हमें अदाएं कम और मर्यादाएं ज्यादा पसंद हैं….

लोकतंत्र ज़िंदाबाद..!संविधान ज़िंदाबाद..!हिन्दुस्तान ज़िंदाबाद..!

हटा पतझर के पहरा, तनिक मधुमास आवे द उदासल मन का देहरी पर, किरिन सविलास आवे द। कसक एतना, मसकि जाता करेजा, दर्द अइसन बा जिये के होसिला लेके, नया उल्लास आवे द। झुकल आकास देखता, घुटन से जिन्दगी ऊबल चुकल एहसास, बिनती बा, नया...

आए हैं सो जाएँगे, राजा रंक फकीर । एक सिंहासन चढ़ि चले, एक बंधे जंजीर॥ कबीर

परिवर्तन केवल कर्म से आता है, ध्यान और प्रार्थना से नहीं। दलाई लामा

ख्वाहिशें अनेक हैं "मन" में, लेकिन परिस्थितियां "दम" तोड़ रही हैं, खुशियां दिखा कर "मुकद्दर", मेरे सारे "ख्वाब" तोड़ रही हैं, घर "जर्जर" है, बहन भी "ब्याहना" है, लेकिन ये "मुफलिसी" भी भारी है, मध्यम वर्गीय "पुरुष" के कांधे पर "परिवार" सबसे बड़ी जिम्मेदारी है..!! विरक्ति

हर मुश्किल से टकराना चाहता हूं ,तू इश्क़ कर मैं निभाना चाहता हूँ !!

तुम निभा नहीं पाये वो अलग बात है,,,,,, लेकिन वादे कमाल के किये थे तुमने,,,,,,✍️

तुम्हारे जुल्मों का हिसाब लिखूं सोच रहा हूँ इश्क़ पर एक किताब लिखूं...

पहले हेलीकाप्टर नेता आयेअब हेलीकाप्टर पत्रकारिता आ गई…विकसित होने का रास्ता या दिवालियापन…

भूखे पेट तेज धूप में तपता बहुत है गरीब का खून है साहेब ये सस्ता बहुत है

जीवन में वही रिश्ता बेहतर हैं,जो पीठ पीछे भी सम्मान दे…

हम को बचपन ही से इक शौक़ था बर्बादी से नाम लिख लिख के मिटाते थे ज़मीं पर अपना!


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