कान भरने वाले से दूर रहा करो,
वरना ये लोग अपनों से दूर कर देंगे…
पिताजी के बाहर जाने पर मां कभी
किवाड़ तुरंत बन्द नहीं करती थीं.
खुली छोड़ देती थीं सांकल
कभी कभी पिताजी
कुछ दूर जाकर लौट आते थे
कहते हुए..
कि कुछ भूल गया हूं
और मुस्कुरा देते थे दोनों...
मां ने सिखाया...
किवाड़ की खुली सांकल
किसी के लौटने...
मैं तुम को भूल तो जाऊँ .. मगर छोटी सी उलझन है,
सुना है दिल से धड़कन की जुदाई .. मौत होती है
ज़ेहन ने मुझे कहा था पर हमनें दिल नहीं बदला
तुम ही दूर होते गए, हमनें मंज़िल नहीं बदला
बिछड़ते वक्तगले लग कर इश्क़ वाले
अपनी रूह इक दूसरे मेंछोड़ आते हैं।
गाली तो नही देते हम पर इन गुप्तसूत्रों को बहुत गरियाने का मन कर रहा है
कभी-कभी लोग सच नहीं सुनना चाहते क्योंकि
वे नहीं चाहते कि उनका भ्रम टूट जाए।
फ़्रेडरिक नीत्शे
अकेलेपन की अजब वो इंतहाएँ करता हैतुम्हारे बाद ये घर सांय-सांय करता है
हर आदमी बेईमानी की तलाश में है,और हर आदमी चिल्लाता है,बड़ी बेईमानी है।
तुम्हारी नोजरिंग पर कविता लिखने बैठता हूं तो कलम टूट जाती है.
विश्वास बन के लोग ज़िन्दगी में आते है,ख्वाब बन के आँखों में समा जाते है,पहले यकीन दिलाते है की वो हमारे है,फिर न जाने क्यों बदल जाते है !
सफलता सार्वजनिक उत्सव है
जबकि असफलता व्यक्तिगत शोक ….. !!!
आज फिर नहीं आई नींद रात भर
क्योंकि कल पूरा दिन में सो रही थी !!
जो दूसरों की स्वाधीनता छीनते हैं, वास्तव में कायर हैं।
क्यूं सोचें, के चार लोग क्या कहेंगे?
समाज में महज़ चार लोग थोड़ी है।
मेने तुझसे चांद सितारे कब मांगे..!
तुम्हरा शक का बोझ इक दिन
इश्क़ की नैय्या डुबो देगी.....!!
जहां बातें ही तीर सी हों,
वहा रिश्ते छलनी हो ही जाते हैं...
बुराई पर अच्छाई की
असत्य पर सत्य की
अधर्म पर धर्म की
नफ़रत पर मोहब्बत की
जीत सदैव सुनिश्चित है