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अहमियत यहां हैसियत को मिलती है और हम जज़्बात लिए घूम रहे हैं!

छोटी नदी को उमड़ते देर नहीं लगती मुंशी प्रेमचंद

यहीं कहीं दफ़न हो जाएंगे मेरे साथ मेरे अरमान भी,मेरी वफ़ा के बदले मुझे "तड़पन" ईनाम मिली है..!!

हमारी भी तमन्ना थी किसी को हमारी याद आती बारिशों में.

शीशे, यादें, सपने, रिश्ते, कब कहाँ टूट जाए कुछ नहीं पता।

कभी गोधूलि बेला मेंघंटा ध्वनि से तुम आ जाओ….🌿

मेरी जिंदगी मै खुशियां तेरे बहाने से है, आधी तुझे सताने से है आधी तुझे मनाने से है।

बारिश में भीग मन बावलाधीरे-धीरे पट हृदय के खोल रहाआंखों से चूम तन बावलामृग कस्तुरी बन स्वच्छंद दौड़ रहा

सबसे बेज़ार हो गया हूं मैं ज़ेहनी बीमार हो गया हूं मैं…!!! कोई अच्छी ख़बर नहीं मुझमें यानी अख़बार हो गया हूं मैं…!!!

छोटी छोटी चीजों में खुशी ढूंढना सीख लो, जरूरत पड़ने पर अपना हाथ खुद पकड़ना सीख लो।

उसने लिखी मेरी लिए कई ग़ज़लें ढेरों कविताएँ ख़ूबसूरत नज़्में मगर मैंने सिर्फ़ उसका नाम लिखा दिल पे और अपना बना लिया

दोनों की मोहब्बत जुदा जुदा कभी तू मुझसे कभी में तुझसे खफा ख़फ़ा,,,,आ लग जा गले मिलकर करें अपने दरमियान सारे मसले रफा दफा,,,,

ख़ुदख़ुशी करने से मुझे परहेज नहींबस शर्त इतनी हैं की फंदा तेरी जुल्फो का हो….!!

लाखों की कमाई भांड़ में जाए , मुझे पापा के हाथों दस का नोट लेना है!

राख बेशक हूँ मगर सुलगने की तमन्ना अभी भी है , जिसको जलना है वो हवा अभी भी दे सकता है ..!!

बहुत कुछ लिखा गया ,बहुत कुछ पढ़ा गया,परन कोई किसी के आँसू लिख सका,न कोई किसी के दर्द पढ़ सका..!!

ख्वाब ख्वाहिश और लोग,जितने कम हों उतना अच्छा है…

ए इश्क़ मुझे अब और जख्म चाहिए, मेरी शायरी में अब वो बात नही….!!

माँ वो बगीचा है; जिसकी छाँव में ना जाने कितने ही फूल फलते-फूलते हैं।


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