मोहब्बत का तरीका सबसे जुदा रखा है..
ज़िक्र हर बात में तेरा, मगर नाम छुपा रखा है..
आज फिर ग्रह मिले है, आज फिर कायनात ने संदेश भेजा है ,आज फिर उसकी याद आईं है, आज फिर गलतियों पर रोना आया है ,आज फिर …..।।
बाप गरीब जरूर है लेकिन इस बेटी के लिए ,
एक राजा की तरह सभी ख्वाइशें पूरी करता है ।।
रेल की तरह गुजर तो कोई भी सकता है...
इंतजार में पटरी की तरह पड़े रहना ही असली इश्क है..!!
धूप भी कहां कुछ कर पाया है ,
जब तक सर पर मां का साया है ।।
नियत सच्ची होनी चाहिए, चेहरे तो अक्सर झूठ बोलते हैं...
खामखां मैने गहराई पसंद कर ली,
कोई उतरा ही नहीं मेरी सोच तक ।
दर्पण देख सँवर गए कितने
अपने पर ही मर गए कितने
ख़्वाबों की खेती को सच के
कीट-पतंगे चर गए कितने
प्यार वफ़ा ईमान की बातें
करके लोग मुकर गए कितने
फ़ाइलें सब्ज़ योजनाओं की
चूहे रोज़ कुतर गए कितने...
कहीं चाँदी की है चम्मच
और रेशम के खिलौने हैं
कहीं काँटों का है बिस्तर
और बस सपन सलोने हैं
सुधीर...
जीवन में चाहे परिस्थितियां कैसी भी रहें,
वो अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभाता है,
और पत्नी के प्रति यदि वफादार है पुरूष,
तो मां बाप के लिये श्रवण कुमार कहलाता है..!!
बात से बदलने वाले और जज़्बात से खेलने वाले इंसान से दूरी जितना बना के रखो उचित होता है...
जिन वृक्षों की जड़ें गहरी होती हैं,
उन्हें बार-बार सींचने की जरूरत नहीं होती ।
अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत के सब बंदे
एक नूर ते सब जग उपजा कौन भले कौन मंदे
बातों बातों में माँ ने फिर पूछा है ,बेटा, क्या छुट्टी बढ़वाई जा सकती है?
समझो जग को न निरा सपना
पथ आप प्रशस्त करो अपना
मैथिलीशरण गुप्त
जिंगदी तू भी यूं बेवफा निकलीशिद्दत से चाहा मगर तू भी गैरो सी निकली
दे कर लबो पर ख़ुशी मेरेदिल में बेइंतेहा दर्द क्यों दे के गयी..!!
मुमकिन नहीं मेरा पहले जैसा हो पाना
खुद को बहुत पीछे छोड़ आई हूँ मैं
मेरी अर्जी यही है मेरे बालाकृपा बरसाये रखनामत छोडियो ना मेरा साथदया तुम बनाये रखना
वो सिर्फ़ मेरे थे,
सिर्फ मेरे सामने....
उन अक्लमंदो से दूरी अच्छी है,
जो हमें बेवकूफ समझते हैं...