अपने आप में शांति पाने के लिए, तुम्हें विचारों के बंधनों से मुक्त होना होगा !
देख कर परेशान हूं रिवाज दुनिया का
अब जूठ बोलकर भी लोग शर्मिंदा नहीं होते।
घमंड में आकर अपना सर ऊंचा ना करें,जीतने वाले भी गोल्ड मेडल झुक कर हासिल करते हैं…
पिता का क्रोध कदापि आपका अवरोध नहीं,
सही मार्ग पर चलने का अनुरोध है।
जिसमें प्रेम हो वह हर रिश्ता एक बंधन है,
वरना यूं ही नहीं राधे के साथ देवकी नंदन है।
लोगो से कह दो हमारी तकदीर से जलना छोड़ दे
हम घर से दवा नही ‘माँ की दुआ' लेकर निकलते है।
कमाने वाले को पता होता है पैसे कैसे कमाए जाते हैं,
बैठके खाने वाले लोग हाथ का मैल कह देते हैं।
अनवर चतुर्वेदी
ख़्वाब ख़्वाहिश ख़ैरियत है ज़िंदगीहक़ीक़त उल्फ़त कैफ़ियत है ज़िंदगी
एक उम्र के सौदे में बंधी हुईइनायत इबादत तबियत है ज़िंदगी..!
~ नेहा यादव
दुःख में उपस्थित रहने वाले व्यक्ति, सर्वदा सम्मान के पात्र होते है।
-तरुण श्रीवास्तव
पद और पैसे से कितने भी अपराध छुपा लो साहब,
किसी गरीब की बद्दुआ तुम्हे सुकून से जीने नहीं देगी...
प्रेम का अर्थ है अंत तक उन वादों को निभाना...
जो हमने अनुकूल परिस्थिति में किए थे
कोई तुम पर आंख बंद करके भरोसा करता है,तो कभी उसे ये एहसास ना होने देना की वो अंधा है...
तुमसे प्रेम करने के बाद महसूस हुआ है कि तुमसे बात करने से अक्सर मैं अपनी सारी परेशानियां,मुश्किलें भूल जाया करती हूं,जैसे एक सुकून का अनुभव होता है,जब तुम पास होते हो तो ऐसा लगता है जैसे ईश्वर से की...
इक़ अरसे बाद मिलना हुआ
उसने बस इतना ही पूछा था
आपका मिजाज कैसा है...!
बोल नहीं फूटे बस..आंखे भर आईं
प्यार कितना क्षणिक है और भूलना कितना दीर्घ।
कुछ रहम कर ऐ जिन्दगी थोड़ा सवर जाने दे ,तेरा अगला जख्म भी सह लेंगे पहले वाला तो भर जाने दे..!
आवारा
ये जिन्दगी सिर्फ तब तक ही हल्की है,
जब तक सारे बोझ माँ ने उठाये हुए है ।।
आदमी जब थक जाता है
स्त्री को ढूँढता है
आदमी जब ऊब जाता है
स्त्री को ढूँढ़ता है
आदमी जब टूट जाता है
स्त्री को ढूँढता है
इसे दूसरे तरीक़े से कहें तो
थके,
टूटे,
ऊबे हुए आदमी को
सिर्फ़ स्त्रियाँ...
इंसान की ये आदत है ना मिले तो सब्र नही करता
और मिल जाये तो कद्र नही करता..
आहिस्ता बोलने का उनका वो अंदाज भी गजब था,
कानों तक को खबर न हुई,
और दिल ने सब समझ लिया।