World's Best Cow Hospital

तकलीफ अकेलेपन से नहीं,अंदर के शोर से होती है..

कभी मुख़लिस तो कभी मुनाफ़िक़ हैं ये मतलब परस्त लोग माहौल के मुताबिक़ हैं !

कितना तकलीफ उठाकर कमाते है,,, जब गाँव से कम उम्र के बच्चे शहर जाते है….

जो उन मासूम आँखों ने दिए थे, वो धोके आज तक मैं खा रहा हूँ

दरारें अपनों में, इस कदर ना बढने देना, कि गैरों की जरुरत पड़े, मरम्मत के लिए....

मुझे अकेले चलेने में बहुत मज्जा आता है, क्योंकि ना कोई आगे चलता है और ना कोई पीछे छूटता है…

नए कपड़े बदल कर जाऊं कहां,और बाल बनाऊ किसके लिए..वो शख्स तो शहर ही छोड़ गया,मैं बाहर जाऊं किस के लिए...!!

जब रात है ऐसी मतवाली फिर सुबह का आलम क्या होगा….

कोई ऐसी कला, कोई विधा, कोई शब्द, कोई गुण कोई आचरण बना ही नही जिससे कोई भी अनमना न हो, जिससे किसी को भी शिकायत न हो.

पसंद आईं कुछ भी चीज़ें,ज़्यादा देर तक ठहरती नहीं हैं…

जब तक मनचाहा परिणाम ना मिले , प्रयास करना ना छोड़ें, क्योंकि सब्र करना अफ़सोस करने से बेहतर है ...

भाई को डांटती हुई बहन से खूबसूरत दृश्य भला और क्या हो सकता है

शुरुआत हो चुकी हैं अब बादशाह के साथ बेगम भी नाचेंगी..!

बात नहीं हुई सुबह, सुबह नहीं हुई सुबह से सीधा दोपहर हो गई….

मर्द बेईमानी करे तो मास्टरमाइंडऔर औरत करे तो धोखा

मुझसे ना मिल सकेगा किसी का मिजाज़ , मुझको तो अब गुलाब भी काले पसन्द हैं…..🖤

मैं उनके लिए आम रहता हूँ, जो मेरे लिए खास है..!!

हज़ारो ठोकरें खाकर भी नाबाद बैठी हूँ मैं जहाँ कल थी, वही पर आज बैठी हूँ अँधेरों से नहीं शिकवा, नहीं क़िस्मत से नाराजगी कोई किस्मत को भी सँभाल लूँगी मैं, अब ये ठान बैठी हूँ छोड़ा हैं कई गैरो ने,...

सर्वाधिक आनंद उन्हें प्राप्त होता हैजो मौन रहने की कला सीख जाते हैं

एक छींक की तरहआ जाएगी मृत्युजेब में रूमाल तक नहीं होगा...


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