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सुबह शाम तू मेरी इबादत सा लगे जो कभी ना छूटे वो आदत सा लगे

तूने जो ना कहा मैं वो सुनती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही जाने किसकी हमें लग गई है नज़र इस शहर में ना अपना ठिकाना रहा दूर चाहत से मैं अपनी चलती रही ख़ामख़ाह, बेवजह ख़्वाब बुनती रही ....

वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह

मां ममता की मूरत बन गयी,पिता संघर्ष के प्रतीक रह गए।चोट लगी तो मां के अश्रुधार बहे,पिता मौन में दुःख को सह गए।।

गुरुर है मुझे अपने भी किरदार पर , कोई तुमसा नहीं तो कोई मुझसा भी कहाॅ॓ है ..!!

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लिख देने से, कह देने से, बोझ कहां ख़त्म होते हैं ...

हमें हारना मंजूर है,लेकिन धोखा देकर जीतना मंजूर नहीं है !

सफल रिश्तों के यही उसूल हैं,बातें भूलिए, जो फिजूल हैं…

जिंदगी के सफर में उठे मेरे कदम एक दूजे से बात करते हैं साघते है ज़िन्दगी का सुर मीठा और बहते आवारा हवा से तुम्हें याद करते है राजेश गौरी

इस संसार में सबसे सुखी वह व्‍यक्ति है, जो अपने घर में शांति पाता है...

धैर्य की अपनी सीमाएँ हैं अगर ज़्यादा हो जाए तो कायरता कहलाता है। चाणक्य

थोड़ी सी आवारगी भी जरूरी है जिंदगी में, कैद में रहकर परिंदे अक्सर उड़ना भूल जाते है।

अपना ज़मीर जिंदा रखो, ये पार्टीया तो आती जाती रहेंगी…

खिड़कियां मत खोलो अजनबियों के वास्ते कितने ही खास हो जाएं पर ये वफादार नही होते

त्याग वहीं करें जहां उसकी जरूरत हो, दोपहर में दिया जलाने से अंधकार नहीं खुद का वजूद कम होता है !

जून कीझुलसती गर्मी के मध्य भी जो तुम आ जाओपीपल की घनीछांव के नीचेहम तुम दशहरी आम चखेंगे

तू समझा नहीं जिंदगी का मकसद,तू उलझा रहा लोगों की गलती ढूंढने में.

इस बार ऐसे छोड़ की हासिल ना हो सकू आऊ ना अपने हाथ भी ऐसे गवा मुझे

. इश्क़ का ये पहला सबक होता हैइश्क़ में हुक्म नही हक़ होता है !

लड़कियां बचपन में उतने नखरे नहीं करती, जितना गर्लफ्रेंड का पद मिलने के बाद करती हैं


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