ख़ुद से बेहतर नहीं है कोई भी हमसफ़रअकेले रहना इस्तेमाल होने से बेहतर है !
क्या मनाउ होली..
कैसे मनाउ जश्न...
जब फिलिस्तीन के..
बच्चो के जिस्म पर है..
खुन निकलता जख्म
शीत लहर के स्पर्श से
जब मन झंकार उठा
मधु कूक कोयल से
जब हृदय में ज्वार उठा
तब शब्द हार पहन
विरही मन मुख से कविता गान उठा
मत पूछ मेरी बेबसी का सबब क्या है,
पहले पिघलाया फिर पत्थर किया था..!!
अपने लिए तो सभी जीते हैं,
दूसरों के लिए जीना ही असली जिंदगी है।।
दिल चाहता हैं कि फिर अजनबी बनकर देखेतुम तमन्ना बन जाओ हम उम्मीद बनकर देखे
जब-जब धर्म की ग्लानि-हानि यानी उसका क्षय होता है और अधर्म मे वृद्धि होती है, तब-तब मैं धर्म के अभ्युत्थान के लिए अवतार लेता हूं !!
रोज़ रोज़ ये मुलाक़ात इत्तफाक तो नहीं
मेरी तरह हुजूर धड़कने बेईमान तो नहीं
बिजली विभाग तो यूंही बदनाम है
काटना तो कोई तुमसे सीखे...
तुम मिल सको तो मिल लेना,
कुछ कह सको तो कह लेना...
मैं जी नहीं पाया जुदा होकर तुमसे,
तुम जी सको तो जी लेना...
तुम्हारी नामर्दानगी बुजदिली,
एक दिन इस देश की तबाही का कारण बनेगी।
हमारी भी तमन्ना थी किसी को हमारी याद आती बारिशों में.
कितने शिकवे हैं ज़िंदगी के साथ, फिर भी मरने को दिल किसी का नहीं करता !
जो कल थे,वे आज नहीं हैं।
जो आज हैं,वे कल नहीं होंगे।
होने न होने का क्रम,
इसी तरह चलता रहेगा,
हम हैं,हम रहेंगे, ये भ्रम भी,
सदा पलता रहेगा।।
अटल बिहारी वाजपेई
जैसे जल द्वारा अग्नि को शांत किया जाता है वैसे ही ज्ञान के द्वारा मन को शांत रखना चाहिए !!
ज़िंदगी तू ने मुझे क़ब्र से कम दी है ज़मींपाँव फैलाऊँ तो दीवार में सर लगता है
आदमी दुख में काम आना चाहिए,
ख़ुशी में तों हिजड़े भी नाचने आ जाते हैं...
कितना ख़ास बनाया था हमें ईश्वर ने
हम कितने आम बन गए हैं
मशीनों से ग़ुलामी कराते कराते
मशीनों के ग़ुलाम बन गए हैं
पानी से पानी मिले,
मिले कीच से कीच,
ज्ञानी से ज्ञानी मिले,
मिले नीच से नीच
प्यार नहीं था वो
था वो बस एक दिखावा,
छला दिल को उसने ऐसे
दिया दर्द मुझे ज़िंदगी भर का !!