गौरव गान फिर से ऊंचा होगा ।
चाँद पर भी एक तिरंगा होगा ।
अगर तुमअपनी सांसों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपनी धड़कनों को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अगर तुमअपने छूटते प्राण को रोक सकोतभी किसी को रोकना,अन्यथाजाने दो जिसे जाना है,
मत करो विलाप किसी के जाने का
~ अम्बष्ठ
हर मर्ज का इलाज नहीं दवाखाने में...
सब दर्द चले जाते है मुझे बियर पिलाने से...
मुझसे नफ़रत करनी है तो होंश से करना , ज़रा भी चुके तो मोहब्बत हो जाएगी ..!!
अगर इतिहास को कहानियों के रूप में पढ़ाया जाता तो इसे कभी नहीं भुलाया जाता।
बिजली विभाग तो यूंही बदनाम है
काटना तो कोई तुमसे सीखे...
सोचती हूँ मेहनत की कलम से.... ज़िंदगी की कहानी फिर से लिखूं...!!
जम्हूरियत पर कस रहा फंदा
ख़ुद को ख़ुदा समझ रहा बंदा
बहलाया-फुसलाया, डराया भी
बॉन्ड से भी जुटा लिया चंदा
चुनाव की बिसात धर्म का दांव
नफ़रत का तूफ़ान कभी पड़े न मंदा
किसी को जेल इनके लिए खेल
इन पर भी चलेगा वक़्त का...
जिस प्रकार अग्नि स्वर्ण को परखती है,
उसी प्रकार संकट वीर पुरुषों को।
औरत के लिए कोई व्रत नहीं रखता,
फिर भी लंबी उम्र जी लेती है!!
प्रेम करती हैं राधा की तरह,
मीरा की तरह विष पी लेती है!!
कागा सब तन खाइयो।चुन चुन खाइयो माँस।।दो नैना मत खाइयो।मोहे अच्छे दिन की आस।।
कारवाँ गुज़र गया,
मेघा छाये आधी रात को
खिलते हैं गुल यहाँ
फूलों के रंग से..
गोपाल दास ‘नीरज’