अपनी बेटी को ज्ञान देकर अच्छे और बुरे का,
उसे इस गंदे समाज का आईना दिखाता है,
एक पिता ही है जो मजबूती से हांथ पकड़कर,
उसे कदम से कदम मिलाकर चलना सिखाता है..
जिस रिश्ते को बचाने के लिए आपको अकेले लड़ना पड़े, वो रिश्ता लड़ाई के भी काबिल नही होता...
हर दरबार में जाकर माँगा हैं तुम्हें, प्रसाद मिल जाता है पर तुम नहीं
छोड़े थे तेरी खातिर कितने हसीन लोग
उनमें से एक के बराबर भी नहीं हैं तू
परिवर्तन केवल कर्म से आता है,
ध्यान और प्रार्थना से नहीं।
दलाई लामा
कीचड़ में पत्थर नहीं मारा जातासूखने का इंतज़ार किया जाता है
मुझे प्रेम तुझसे है तो है..!अब क्या मुकद्दमा करोगी मुझ पर…!!🍹
जिंदगी भर डर डर के रिश्तों को,
निभाने से बेहतर है अलग हो जाना...
अगर अंधे आदमी को आंख मिल जाए तो वो
सबसे पहले छड़ी फेंकता है जिसने बुरे वक्त में
उसका साथ दिया ...
दुनिया में आए हो तो जीने का हुनर रखनादुश्मनों का डर नहीं बस अपनो पे नज़र रखना
अब क्या ही काहू अपने मां के बारे में..मां के ताने और खाने का कोई जोड़ नहीं..!!
लगेगी आग तो आएंगे घर कई जद में,
यहां पे सिर्फ हमारा मकान थोड़ी है'
अंगुलियां यूं न सब पर उठाया करो,
खर्च करने से पहले कमाया करो
राहत इन्दौरी
हमने इश्क में खुद को खोया है ,ये वफ़ा की मिसालें हमें न सुनाओ ..!!
सुनो मेरे दोस्तों पैसा इतना कमाओ की,चार लोग तुम्हे अपना दामाद बनाना चाहे…
लंबी छलांगों से कहीं बेहतर है निरंतर कदम,जो एक दिन आपको मंजिल तक ले जाएगा !!
"कर्मणये वाधिकारस्ते मां फलेषु कदाचन।"
मनुष्य अधिक चतुर बनकर अपने को अभागा बना लेता है।
जयशंकर प्रसाद
अपनी ज़िंदगी में खुद रोशनियां पैदा करो,यकीनजानो तुम्हारे अलावा तुम्हारा कोई भी वफादार नही है ...
मसला सकून का है जान,
वरना जिस्म बाज़ार में भी मिलता है...
मन में कुछ "भरकर" जिएंगे तो...
"मन भरकर" नहीं जी पाएंगे...!!