शहर में आ कर पढ़ने वाले भूल गए
किस की माँ ने कितना ज़ेवर बेचा था
हम दोनों धोखा खा गए हैं..मैंने तुम्हें औरों से अलग समझा, और तुमने मुझे औरों जैसा समझा..!!
दोनों भाई बहनों को ऊंट भी चाहिए और राजस्थान भी नहीं जाना चाहते..शास्त्रों में इसे ही कूटनीति कहा गया है…
अपने को साधारण आदमी मानना भी एक ताक़त है।
ऐसा आदमी असाधारणता के कोई फालतू सपने नहीं देखता,
और निराश नहीं होता, टूटता नहीं।
कुदरत को गहराई से देखो,आपको सब कुछ साफ-साफ समझ आएगा !
नफरत का बाज़ार ना बन, फूल खिला तलवार ना बन,रिश्ता रिश्ता लिख मंज़िल, रस्ता बन दीवार ना बन- राहत इंदौरी
सुनोतस्वीर मेंतुम्हें देखनातुम्हें याद करनातुम्हें महसूस करनाऔर हर पल यह सोचनाकि तुम होती तो ऐसा होताग़र जो तुम होती तो वैसा होताहाय! सब कुछ कितना प्यारा होताकितना, कितना, कितना ही सुन्दर होता…
पलकों से रास्ते के कांटे हटा देंगेफूल तो क्या हम अपना दिल बिछा देंगेटूटने न देंगे हम इस प्यार को कभीबदले में हम खुद को मिटा देंगे 🌶
उनसे कहो कि वो चाय के वक्त पर हमें बुला ले लेना.
हमें ऐ रोज़-रोज़ का अच्छा नहीं लगता चाय बनाना...
मालती
किसको सुनाऊं मैं अपनी दर्द भरी दस्ताकोई मुह बना लेती है,तो कोई भाई
त्याग दो सब ख्वाहिशें कुछ अलग करने के लिए‘राम’ ने खोया बहुत कुछ ‘श्री राम’ बनने के लिए...
वो फूल जो मेरी कबर पर डालने का आप इरादा रखते है, वो मेरी जिंदगी में ही दे दीजिए खुशी होगी...
अगर पैसा और संबंध दोनों में से एक को महत्व देना पड़े तो, संबंध को बचाना पैसा तो आता जाता रहेगा..!!
मोहब्बत में कहाँ कोई उसूल होता है❤️❤️दिल जिसे चाहे बस वही कुबूल होता है
चाय पर मै एक संविधान लिखूँगा
जो चाय नहीं पीते उन्हे खराब लिखूँगा...
मूर्ख से तारीफ सुनने से बेहतर हैं,
बुद्धिमान की चार गालियां सुन लो...
जिन्हें दूरबीन लेकर बुराई ढूँढ़ने का शौक़ है , उन्हें आईना पकड़ा देना चाहिए ...
"फूल चुन कर एकत्र करने के लिए मत ठहरो। आगे बढ़े चलो, तुम्हारे पथ में फूल निरंतर खिलते रहेंगे"
~रबीन्द्रनाथ ठाकुर
मां ममता की मूरत बन गयी,पिता संघर्ष के प्रतीक रह गए।चोट लगी तो मां के अश्रुधार बहे,पिता मौन में दुःख को सह गए।।
जिंदगी में हजारों लोग आवाज देंगे,
मगर वही बैठना जहां अपनेपन का एहसास हो...