कितने हसीन नाज़नीन मिले तुम नहीं मिलेकुछ आप जैसे भी मिले पर तुम नहीं मिलेबारिश फिज़ा तुम्हारी पसंदीदा चाय भीमिलने के आसार तो लगे फिर भी तुम न मिले..
गैरों पर कौन गौर करता है , बात जब भी चुभती है अपनों की चुभती है...
नौकरी मांगने पर लाठियां से पीटा जाएगा इंसाफ मांगने पर सड़क पर घसीटा जाएगा
कभी मिलो तो कुछ देर बैठेंगे..अधूरी शिकायतों को आजादी भी देनी है..!!
जरूरी नहीं कि काम से ही इंसान थक जाए,
कुछ ख्यालों का बोझ भी, इन्सान को थका देता है !
अफ़सोस इंसानियत को भुला कर इंसानइंसानियत दिखाने का ढोंग बहुत करता है
एक शाम की मोहताज हैं दुनिया सारी ,एक शाम हल्की सी हर दर्द पर भारी ..
दिल से उतर जाने वाले लोग
सामने खड़े भी हों तो भी नज़र नहीं आते !
त्रुटियों के बीच में से ही सम्पूर्ण सत्य को ढूंढा जा सकता है।
सिगमंड फ्रायड
डिग्रिया तो आपकी पढ़ाई के खर्च की रसीदें है.. ज्ञान वही है जो आपके किरदार में झलकता है.!
आँख के अंधे को दुनिया नहीं दिखती,
काम के अंधे को विवेक नहीं दिखता,
मद के अंधे को अपने से श्रेष्ठ नहीं दिखता,
और स्वार्थी को कहीं भी दोष नहीं दिखता।
चाणक्य
आइने से डर जाएंगे लोग यहां...
कभी किरदार नज़र आया जो चेहरे की जगह..!
मसला ये नहीं की लोग परवाह क्यों नहीं करते,
मुद्दा ये है की हम उम्मीद क्यों करते हैं...
मित्रता बड़ा अनमोल रतन
कब उसे तोल सकता है धन?
धरती की तो है क्या बिसात?
आ जाय अगर बैकुंठ हाथ
उसको भी न्योछावर कर दूँ,
कुरूपति के चरणों में धर दूँ।
सिर लिए स्कंध पर चलता हूँ,
उस दिन के लिए मचलता हूँ,
यदि चले वज्र दुर्योधन...
तुम्हारा वक़्त है कर लो नज़रअंदाज़ हमको
हमारे वक़्त पर अफ़सोस मत करना मगर तुम
आज ये दिल बेवजह ही खुश हैं
लगता है एक नया दर्द मेरे इंतजार में हैं
मैं निभाता रहा वफ़ा वो धूल झोंकती रही,
फना करके मेरी रूह मुझे दफन करती रही..!!
मैं तेरे साथ 'गुज़ारा' भी नहीं कर सकता..
और अफ़्सोस 'किनारा' भी नहीं कर सकता..!!
पैसा इंसान का लिबास तो,
बदल सकता है पर औकात कभी नहीं...
मुझ जैसी आफत में तुम्हारी शराफत कम पड़ जायेगी,मुझसे ज्यादा बात करोगे तो मेरी आदत पड़ जायेगी